एसकेएम (गैर-राजनीतिक) भारत एफटीए के विरोध और लंबित किसानी मांगों को लेकर देशव्यापी एकता के प्रयास जारी रखेगा: एसकेएम
mahendra india news, new delhi
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) भारत की जूम बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न राज्यों के किसान नेताओं ने केंद्र एवं राज्य सरकारों की किसान विरोधी नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बैठक में नेताओं ने कहा कि देश के सभी किसान संगठनों को अपने-अपने अहंकार और मतभेदों से ऊपर उठकर किसानों के हितों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापक किसान एकता के बिना चले किसान आंदोलन भाग-2 के अनुभवों से सबक लेने की आवश्यकता है।
401 दिनों तक चले आंदोलन के दौरान युवा किसान शुभकरण सिंह सहित 45 किसानों ने शहादत हुई, लेकिन किसानों की मांगें आज भी अधूरी है। एसकेएम (गैर-राजनीतिक) भारत ने बताया कि फरवरी माह से ही विभिन्न किसान संगठनों और मोर्चों के साथ व्यापक किसान एकता स्थापित करने के लिए लगातार बैठकें की जा रही हैं। चंडीगढ़ में आयोजित एकता बैठक के दौरान भी एसकेएम गैर-राजनीतिक भारत ने सभी किसान संगठनों को एक मंच पर लाने का अपना स्पष्ट पक्ष रखा था। बैठक में नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किसान विरोधी मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को लागू करने के प्रयास देश के किसानों के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होंगे।
पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को आर्थिक रूप से और अधिक कमजोर करने वाले ऐसे समझौतों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही निर्णय लिया गया कि किसान आंदोलन भाग-1 और भाग-2 की लंबित मांगों को लेकर संघर्ष पहले की तरह लगातार जारी रखा जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि चंडीगढ़ में नए बने मोर्चे का गठन एक सकारात्मक पहल है, लेकिन जिस सांझे मोर्चे में देश के सैकड़ों किसान संगठनों ने एकजुट होकर तीनों काले कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक संघर्ष किया और उन्हें वापस करवाया, उस संघर्ष से जुड़े सभी संगठनों को साथ लेकर चलना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में देशव्यापी किसान आंदोलन का नेतृत्व करने वाले मोर्चे में जिम्मेदारियां तय करते समय दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान विभिन्न नेताओं की भूमिका और उनके कार्यों का भी निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना भी जरूरी है। एसकेएम गैर-राजनीतिक भारत ने स्पष्ट किया कि व्यापक किसान एकता ही किसान आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है। देशव्यापी किसान जत्थेबंदियों तथा मोर्चों की एकता के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। संपूर्ण किसान एकता स्थापित होने तक एसकेएम गैर-राजनीतिक भारत नए बने मोर्चे की किसी भी कमेटी का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन किसानों के हितों के लिए उस मोर्चे द्वारा घोषित सभी संघर्ष कार्यक्रमों को बाहर से समर्थन देगा।