कोई वेलेंटाइन प्रकृति व बेजुबान जीवो के कल्याण हेतु भी हो

 

mahendra india news, new delhi

लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
प्रेम शब्द संस्कृत की प्री धातु से बना है जिसका अर्थ है प्रसन्न करना, आनंदित करना। यह शब्द प्रिय शब्द से व्युत्पन्न है, जो प्र ( प्रकृति) तथा मिनन प्रत्यय के मेल से प्रेमन शब्द बनता है जिसका अर्थ  स्नेह का भाव होना है। वेलेंटाइन दिवस एक संत के नाम पर मनाया जाता है जिसे प्रेम का दिवस कहते है, यहां यह बात समझने की आवश्यकता है कि संत कोई भी हो किसी भी पंथ संप्रदाय से हो, वो शांति के दूत ही माने जाते है, और शांति बिना प्रेम के आ ही नहीं सकती है, जहां अहिंसा है वहीं शांति होती है। संत, शांति का प्रतीक माना जाता है। जब हम प्रेम की बात करते है तो ये हर इंसान का प्राकृतिक गुण है जो प्र और मिनन प्रत्यय से मिलकर बना है,

जिसमें प्रकृति शब्द भी है। प्रेम इंसान का आधारभूत गुण होता है, जिससे इस वसुधा पर शांति स्थापित होती है। प्रेम होना है, करना नहीं होता है, यह एक प्राकृतिक गुण है, जो सभी के लिए है, जो होता ही है।  प्रेम केवल कोई वेलेंटाइन दिवस के लिए ही नहीं है, यह हर इंसान के जीवन का आधार है। प्रेम कोई किसी से उधार लेने वाली वस्तु नहीं है कि वो व्यक्ति विशेष के लिए ही होती है, या दिन विशेष के लिए भी नहीं होती है, ये सतत है, ये शाश्वत है, ये सभी के लिए है, और हर दिन के लिए है।

भगवान श्रीकृष्ण जी श्रीमद्भगवद् गीता के बारहवें अध्याय के 15 वे श्लोक में कहते है कि " यस्यमनोदविजते लोको लोकाणुद्विजते च य:। हर्ष्मर्शभयुद्वेग्यमुक्तो य: स च में प्रिय।।" अर्थात जो न किसी को असहज करता है और जो न किसी से असहज होता है, जिसे न खुशी, दुख, भय, चिंता से प्रभावित होता है वह ही मुझे प्रिय है। अर्थात जो प्रेम के गुण का सहारा लेकर लोक व्यवहार करता है वही ईश्वर को प्रिय होता है। जब प्रेम केवल एक वर्ग विशेष के लिए सीमित हो जाता है तो वो प्रेम की परिभाषा से बाहर निकल जाता है, क्योंकि वह प्रेम नहीं फिर आसक्ति बन जाती है। अगर कोई युवा अपने प्रेम का इजहार केवल यौन इच्छा की पूर्ति के हेतु करता है तो वह प्रेम नहीं काम वासना बन जाती है। प्रेम किसी एक के लिए नहीं है,

प्रेम एक जैविक गुण है जो सभी जीवो के लिए है, यह केवल विपरित लिंग के लिए ही नहीं है। प्रेम का इजहार करना तो हमारे व्यवहार में होना चाहिए, चाहे वो किसी पशु के लिए हो, किसी पेड़ पौधों के लिए हो, किसी वन के लिए हो, किसी नदी के लिए हो, किसी गरीब के लिए हो या फिर किसी भी बेजुबान पशु पक्षी के लिए हो, वही प्रेम है। जहां संवेदना है, जहां निर्भीकता है, जहां निष्पक्षता है, जहां न्याय है वहीं प्रेम है, अन्यथा सब दिखावा है। हमे प्रेम का प्रदर्शन किसी लड़की या लड़के को रिझाने के लिए ही नहीं करना है, यह सार्वभौमिक है, सभी के लिए है,यह असीम है, यह शब्द नहीं भावना है,

जिसे हम अपने शब्दों में, अपने कृत्य में, अपनी आदतों में या दूसरे से संवाद में प्रदर्शित करते है। क्रोध का विलोप भी प्रेम का इफेक्ट है, जब व्यक्ति के हृदय में प्रेम की भावना होती है तो उसके लिए क्या बुजुर्ग, क्या बच्चें, क्या महिला पुरुष, क्या पेड़ पौधे, क्या जीव जंतु, क्या नदियां सभी एक बराबर होते है। किसी एक से प्रेम नहीं किया जाता है, वो आसक्ति होती है, वो चाहत के सिवाय कुछ और नहीं होता है। चलो हम मान लेते है कि वेलेंटाइन दिवस प्रेम का दिन है, इसे  कहने का दिन है, किसी को प्रभावित करने का दिन है, किसी को खुश करने का दिन है तो फिर एक वेलेंटाइन तो बेजुबान पशु पक्षियों के लिए भी हो, उन्हें प्रेम करने का दिन भी हो, उनके समाज के प्रति लगाव के लिए भी हो।  मै यहां उन युवाओं से केवल कुछ प्रश्न करना चाहता हूँ जिनका प्रेम वेलेंटाइन के दिन ही असीम हो जाता है, और उसके इजहार के लिए अपनी पूरी ऊर्जा लगा देते है तथा पैसा भी अनाप शनाप खर्च करते है,

उनसे कुछ प्रश्न इस प्रकार है, जैसे;
1. क्या उन्होंने कभी किसी पेड़ को कटने से बचाने के लिए प्रेम का इजहार किया है?
2. क्या उन्होंने कभी किसी वन को बचाने के लिए अपने उफनते हुए प्रेम को प्रदर्शित किया है? 
3. क्या उन्होंने कभी अपने मातापिता की सेवा के लिए, उनकी बात को मानने के लिए अपने प्रेम को प्रदर्शित किया है?
4. क्या उन्होंने खेजड़ी के वृक्ष को बचाने के लिए अपने प्रेम को प्रदर्शित किया है?
5. क्या उन्होंने किसी जीव, कुत्ते बिल्ली, बेजुबान पशु पक्षी को बचाने के लिए अपने प्रेम का इजहार किया है?
6. क्या उन्होंने राष्ट्र समाज को लूटने वाले लोगों को बेईमानी करने से रोकने के लिए अपने प्रेम को प्रदर्शित किया है?
7. क्या उन्होंने किसी गरीब विद्यार्थी को पुस्तके दिलाने में सहयोग या उन्हें कपड़े दिलाने या उन्हें शिक्षा दिलाने में कभी अपने उफनते हुए प्रेम को प्रकट किया है?


8. क्या कभी हमने किसी नदी को साफ करने के लिए नदियों के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया है?
9. अपने राष्ट्र के प्रति ईमानदार जीवन जीने, परिश्रम करने तथा सत्य अहिंसा के लिए अपने प्रेम रूपी गुण को प्रदर्शित किया है?
10. क्या उन युवाओं ने कभी अपनी बहन बेटियों की सुरक्षा के लिए अपने प्रेम की उफनती हुई ऊर्जा का इजहार किया है?
11. क्या युवाओं ने अपनी प्रकृति के संरक्षण के लिए, स्वच्छता के लिए, पर्यावरण संरक्षण या जल संरक्षण, अपने जोहड़ तालाबों के संरक्षण हेतु प्रेम का इजहार किया है?


इन सभी प्रश्नों का उत्तर एक ही है और वो शायद ना में है, क्योंकि युवाओं के लिए प्रेम का मतलब केवल अपने विपरित लिंगी दोस्त के लिए है, उनके प्रेम का मतलब उन्ही की तुष्टि में सब कुछ लुटाना है, उनके लिए प्रेम केवल किसी कामवासना की पूर्ति के लिए ही है, क्योंकि कोई किसी कुत्ते बिल्ली को "आई लव यू" नहीं बोलते है, कोई किसी किसी वृक्ष को आसी लव यू नहीं बोलते है, कोई किसी नदी को आई लव यू नहीं बोलते है, कोई अपने गाँव के तालाब को आई लव यू नहीं बोलते है। युवा दोस्तों, प्रेम को इतना छोटा मत करो, प्रेम को इतनी संकीर्ण परिभाषा में मत बांधो, प्रेम को वासना या आसक्ति से मत जोड़ों।

युवा दोस्तों, प्रेम शब्द विराट है, असीम है, शांति, संवेदना, सत्य अहिंसा, निष्पक्षता या निर्भीकता उत्पन्न करने वाला है, जो मातापिता, बड़े बुजुर्ग, छोटे भाई बहन, प्रकृति, पेड़ पौधे, नदियां, पर्वत, पहाड़, अरावली, शिवालिक, खेजड़ी वृक्ष, जोहड़ तालाब, सभी बेजुबान पशु पक्षी, सभी जीव, वनस्पति जगत सभी के लिए एक जैसा मायने रखता है, प्रेम शब्द यूनिवर्सल है, जैसे सूर्य, चांद, सुगंध, ऊर्जा, रौशनी, ज्ञान, स्वास्थ्य, भोजन, पानी, प्राकृतिक संसाधन है वैसे ही प्रेम भी यूनिवर्सल गुण है, जिसे बिना किसी शब्द, बिना किसी संकेत, बिना किसी आसक्ति के भी प्रकट किया जा सकता है। आओ इस बार की वेलेंटाइन बेजुबान जीवो तथा प्रकृति के संरक्षण के लिए समर्पित करें और वसुधा को शांतिमय बनाएं।
जय हिंद, वंदे मातरम
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर