70 साल की उम्र में भी पानी में रफ्तार, कैप्टन गुगन सिंह इन्सां ने जीता सिल्वर

 

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उम्र के इस पड़ाव पर जब अधिकांश लोग खेलों से दूरी बना लेते हैं, वहीं शाह सतनाम जी बॉयज शिक्षण संस्थान के पूर्व स्विमिंग प्रशिक्षक एवं इंडियन आर्मी से रिटायर्ड 70 वर्षीय कैप्टन गुगन सिंह इन्सां ने अपनी फिटनेस और जज्बे का शानदार उदाहरण पेश किया है। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा से उन्होंने बेंगलुरु में चल रही द्वितीय एशियन मास्टर स्विमिंग चैंपियनशिप-2026 में 70 से 74 आयु वर्ग की 100 मीटर बैक स्ट्रोक स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। प्रतियोगिता में 2200 से अधिक तैराक हिस्सा ले रहे हैं। शुक्रवार को उनका 200 मीटर बैक स्ट्रोक इवेंट भी होगा। उनकी शानदार उपलब्धि पर शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थान के प्रशासक चरणजीत सिंह इन्सां सहित सभी शिक्षण संस्थानों के प्रिंसीपल, स्टाफ सदस्यों व खिलाड़ियों ने उन्हें बधाई दी और उज्जवल भविष्य की कामना की।
 

आर्मी में हजारों जवानों को दी गन शूटिंग की ट्रेनिंग
कैप्टन गुगन सिंह इन्सां इंडियन आर्मी की राजपूत रेजिमेंट में गन शूटिंग कोच रहे हैं। उन्होंने हजारों सैनिकों को गन शूटिंग का प्रशिक्षण दिया। राष्ट्रीय स्तर की
प्रतियोगिताओं में उन्होंने तीन पदक हासिल किए, जिसके बाद उनका चयन एशियन चैंपियनशिप के लिए हुआ। वे इंडियन आर्मी में स्विमिंग कोच की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। बाद में वे आॅनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए।

 

शाह सतनाम जी बॉयज स्कूल में 21 साल दी सेवाएं
सेवानिवृत्ति के बाद भी कैप्टन गुगन सिंह इन्सां का खेलों से जुड़ाव जारी रहा। उन्होंने वर्ष 2004 से 2025 तक शाह सतनाम जी बॉयज स्कूल में स्विमिंग कोच के रूप में सेवाएं दीं। उनके प्रशिक्षण में तैयार हुए विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। एशियन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन 21 नवंबर से मलेशिया में होने वाले स्विमिंग मास्टर्स वर्ल्ड कप के लिए भी हुआ है।

कैप्टन गुगन सिंह इन्सां ने अपनी उपलब्धि का श्रेय डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की प्रेरणा, परिवार, साथियों और निरंतर अभ्यास को दिया। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरु जी की प्रेरणा से उन्हें खेल के क्षेत्र में लगातार मेहनत करने और बेहतर प्रदर्शन के लिए ऊर्जा मिलती है। 70 वर्ष की उम्र में भी उनका यह प्रदर्शन युवाओं और खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने साबित किया कि उम्र नहीं, बल्कि जुनून, अनुशासन और निरंतर मेहनत सफलता की असली कुंजी है।