जिला के विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं के प्रभावी संचालन के लिए सख्त निर्देश जारी, गुणवत्ता सुधार पर जोर

 

SIRSA जिला शिक्षा विभाग द्वारा विज्ञान शिक्षण को अधिक प्रभावी, रोचक एवं व्यवहारिक बनाने के उद्देश्य से सभी सरकारी विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के सभी विद्यालय प्रमुखों को इन निदेर्शों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करवाने के आदेश दिए गए हैं।

विभाग द्वारा जारी निदेर्शों में स्पष्ट किया गया है कि अब विज्ञान शिक्षा केवल सैद्धांतिक न रहकर पूर्णत: प्रयोगात्मक और गतिविधि-आधारित होगी। इसके तहत सभी विज्ञान प्राध्यापक एवं अध्यापक नियमित रूप से प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों से प्रयोग, मॉडल निर्माण, प्रोजेक्ट कार्य एवं नवाचार गतिविधियां करवाएंगे। इन सभी गतिविधियों का विधिवत रिकॉर्ड लॉग बुक में संधारित किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त विद्यालयों में उपलब्ध विज्ञान एवं गणित किट्स/सामग्री के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी उपकरण अनुपयोगी या सीलबंद अवस्था में न रहे। निरीक्षण के दौरान लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अध्यापक की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

विद्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रयोगशालाओं में मूलभूत सुविधाएं जैसे विद्युत व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, उचित फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड, वेंटिलेशन एवं पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण में सीखने का अवसर मिल सके। निदेर्शों के अनुसार कक्षा 9वीं से 12वीं तक की विज्ञान कक्षाएं यथासंभव प्रयोगशालाओं में संचालित की जाएंगी तथा पूरे प्रैक्टिकल पाठ्यक्रम को प्रयोगशाला में प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं कक्षा 6वीं से 8वीं तक के विद्यार्थियों को अपर प्राइमरी साइंस किट  के माध्यम से गतिविधि आधारित शिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रैक्टिकल नोटबुक अनिवार्य कर उसका नियमित मूल्यांकन भी किया जाएगा।


जिला विज्ञान विशेषज्ञ डा. मुकेश कुमार ने बताया कि विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा एवं रुचि विकसित करने के लिए प्रयोगशाला दर्शन कार्यक्रम को विशेष रूप से लागू किया गया है। इसके अंतर्गत सप्ताह में दो दिन प्रार्थना सभा के दौरान विज्ञान उपकरणों का प्रदर्शन, छोटे-छोटे प्रयोग एवं रोचक गतिविधियां करवाई जाएंगी। इस कार्यक्रम की रिपोर्ट एवं छायाचित्र नियमित रूप से संधारित एवं साझा किए जाएंगे तथा इसके लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यालयों में आनंदमय शनिवार के अंतर्गत विज्ञान आधारित क्विज, मॉडल प्रतियोगिता एवं नवाचार गतिविधियों का आयोजन कर विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सभी विद्यालयों में विज्ञान कक्षाओं की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए। विज्ञान शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए विद्यार्थियों एवं अध्यापकों की विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय कार्यक्रमों में भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, जिनमें इंस्पायर अवार्ड मानक योजना, विज्ञान संगोष्ठी, विज्ञान नाटक, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी, जिला स्तरीय विज्ञान प्रश्नोत्तरी एवं निबंध लेखन प्रतियोगिता, पृथ्वी विज्ञान ओलंपियाड, बुनियाद एवं सुपर-100 जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रयोगशाला दर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाएगी। विद्यालयों में सुझाव पेटी स्थापित कर विज्ञान शिक्षण से संबंधित सुझाव प्राप्त किए जाएंगे तथा दीवार पत्रिका या सूचना बोर्ड के माध्यम से नवीनतम वैज्ञानिक खोज, उपलब्धियां एवं रोचक तथ्य प्रदर्शित किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हो सके।

सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी प्रयोगशालाओं में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र एवं आवश्यक सुरक्षा निदेर्शों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही प्रयोगशालाओं में किसी भी प्रकार का कबाड़ या अनावश्यक सामग्री रखने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। विज्ञान शिक्षण की गुणवत्ता की नियमित निगरानी के लिए मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिनमें शिक्षकों के कार्यों का मूल्यांकन एवं सुधारात्मक सुझाव दिए जाएंगे।

इसके अलावा सभी विज्ञान एवं गणित शिक्षकों को अकादमिक विंग व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे नवीनतम शैक्षणिक गतिविधियों, नवाचारों एवं निदेर्शों से लगातार अपडेट रह सकें। शिक्षा विभाग के इन ठोस एवं दूरदर्शी कदमों से जिले के विद्यालयों में विज्ञान शिक्षा को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच एवं नवाचार क्षमता का विकास होगा, बल्कि वे भविष्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।