कारगिल में शहीद हुए कृष्ण कुमार बांदर की वीरांगना संतोष को विवेकानंद स्कूल अरनियांवाली के छात्रों ने लिखा पत्र 

 

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 गांव तरक्कांवाली के कारगिल में शहीद कृष्ण कुमार बांदर की वीरांगना संतोष देवी को स्वामी विवेकानंद स्कूल अरनियांवाली के छात्रों ने पत्र लिखा है। छात्रों ने पत्र में लिखा है कि हमें गर्व कि देश के लिए कृष्ण कुमार बांदर ने देश के लिए शहीद हुए। हमें उनसे प्र्रेरणा लेकर देश की सेवा करनी चाहिए।


शहीद के बारे में छात्रों को दी जानकारी 
इससे पहले शहीद कृष्ण कुमार बांदर के बारे में जानकारी देते हुए स्कूल के निदेशक राम किशन खोथ ने छात्रों को बताया कि गांव कृष्ण कुमार 21 जुलाई 1997 में सेना में भर्ती हुए। 1999 में उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन से लोहा लेते हुए देश के लिए कुर्बानी दी।

 

गांव तरकांवाली निवासी जय सिंह बांदर के चार बेटे व आठ बेटियां थी। बेटों में कृष्ण कुमार सबसे छोटे थे। कृष्ण कुमार का जन्म 4 मई 1977 में हुआ, जिन्होंने प्रारंभिक शिक्षा निकटवर्ती गांव शाहपुरिया के स्कूल से हासिल की। इसके बाद उन्होंने सेकेंडरी की परीक्षा चोपटा के सरकारी स्कूल में तथा सीनियर सेकेंडरी की परीक्षा पास की। उन्होंने आर्य सीनियर सैकेंडरी स्कूल, सिरसा से हासिल की। 1996 में सिरसा में सेना भर्ती प्रक्रिया के दौरान सभी तरह की परीक्षाएं पास

करते हुए 21 जुलाई 1997 में वे सेना में भर्ती हुए। भर्ती के बाद उनकी शादी संतोष देवी से हुई। घर में खुशियों का माहौल था। शादी के कुछ माह बाद ही कारगिल युद्ध हुआ, जहां कृष्ण कुमार ने भारतीय सेना में अपना फर्ज निभाते हुए शहादत दी।

42 दिन बाद गांव पहुंचा शव
कारगिल में दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद कृष्ण कुमार ने कई आतंकवादियों को मार गिराया। 30 मई के दिन दुश्मनों से लोहा लेते समय उनकी छाती में गोली लगी। उस समय कारगिल की लड़ाई चरम सीमा पर थी। जिसके कारण कृष्ण कुमार का शव बर्फ से ढक गया। गांव में परिजनों को कृष्ण कुमार के शहीद होने की सूचना तो मिली। इसके बाद उनका शव 42 दिन बाद गांव में पहुंचा।