आरोपी पक्ष मनगढंत आरोप लगाकर देनदारी से पीछे खींच रहा हाथ: सुखविंद्र सोनी

 

mahendra india news, new delhi
 सोने-चांदी के व्यापार में धोखाधड़ी के साथ-साथ आरोपी पक्ष द्वारा जान से मारने की धमकी देने के आरोपों के बाद सिरसा निवासी स्वर्णकार व पूर्व जिला प्रधान पीड़ित सुखविंद्र सोनी ने मंगलवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए आरोपी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से नकारा। सोनी ने कहा कि वे इस मामले में भाईचारे के साथ न्याय चाहते हैं, लेकिन आरोपी पक्ष जान बूझकर गुमराह करते हुए उनकी देनदारी से अपने हाथ पीछे खींचना चाह रहा है।


मीडिया के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए सुखविंद्र सोनी ने बताया कि नवंबर 2020 में उसने अजय कुमार के साथ भादरा बाजार स्थित शनि मंदिर के पास अंबा ज्वैलर्स के नाम से सांझेदारी में सोने-चांदी का कारोबार शुरू किया था। उन्होंने अपने मामा के बेटे सुभाष सोनी, जो कालांवाली स्वर्णकार संघ के प्रधान भी हैं, अजय और उसके पिता राजेंद्र कुमार के सामने रोशन लाल और सुंदर दास की मौजूदगी में अजय कुमार को 1565 ग्राम सोना व 6109 ग्राम शुद्ध चांदी दी, जोकि उसने अपने रिश्तेदारों से एकत्रित कर दिया था। उस समय के भाव के अनुसार सोने की कुल कीमत 52 हजार प्रति 10 ग्राम सोने के हिसाब से ली।

जबकि चांदी 68 हजार 500 रुपए के हिसाब से ली गई। उस वक्त सोने-चांदी की कुल रकम 85 लाख 56 हजार 466 रुपए बनी थी। जिसमें से मात्र 600 ग्राम के लगभग सोना उसे वापस दिया गया है, जबकि करीब एक किलोग्राम सोना व 6109 ग्राम चांदी अभी लेनदारी और बनती है। इसके साथ-साथ बठिंडा में की गई दुकानदारी की हिस्सेदारी में अपना हिस्सा निकालकर पूरी राशि ले चुके हैं। लेकिन जब सिरसा का हिसाब मांगते हैं तो वो बठिंडा का हिसाब बताकर सिरसा का हिसाब-किताब करने में आनाकानी करते हैं।

जबकि बठिंडा वाली दुकान से हमने 2.30 लाख रुपए देने की बात रोशन लाल ने मुझे मोबाइल पर बताई और ये रकम भी हमें नहीं दे रहे। सुखविंद्र सोनी ने कहा कि आरोपी पक्ष द्वारा बीते दिवस मेरे और मेरे मामा के बेटे कालांवाली निवासी सुभाष सोनी पर मनगढंत आरोप लगाए हैं, जोकि निराधार हैं। हम कल भी भाईचारे के साथ-साथ ईमानदारी से व्यापार कर रहे थे और आज भी भाईचारे को कायम रखकर ही व्यापार करना चाहते हैं।


उन्होंने कहा कि स्वर्णकार समाज की सिरसा व फतेहाबाद की पंचायत मिलकर इस मामले में मध्यस्ता कर निपटारा करते हैं तो वे तैयार हैं और मेरी मांग है कि दोनों पक्षों से इस बात के लिए शपथ पत्र भी लिए जाएं। इस मौके पर स्वर्णकार समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।