लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में गूंजा SIRSA का नाम, डॉ. जिंदल दंपत्ति सम्मानित
The city's name resonated in London's House of Lords, Dr. Jindal couple honored
Apr 22, 2026, 13:29 IST
Mahendra india news, new delhi
सिरसा शहर के वरिष्ठ होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. कमल जिंदल और डॉ. रूपाली जिंदल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उत्कृष्ट उपस्थिति दर्ज कराते हुए भारत का नाम रोशन किया है। दोनों चिकित्सकों ने लंदन में आयोजित प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन में भाग लिया, जिसका आयोजन लंदन कॉलेज ऑफ होम्योपैथी एवं एशियाई होम्योपैथिक लीग के के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
सम्मेलन के दौरान डॉ. कमल जिंदल और डॉ. रूपाली जिंदल को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य और होम्योपैथी के क्षेत्र में योगदान के लिए आयोजकों द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बना।
शोधपत्रों को मिली सराहना
डॉ. कमल जिंदल ने एलोपेसिया (बाल झड़ने) के होम्योपैथिक उपचार पर आधारित अपनी केस स्टडी प्रस्तुत की। इस शोध में उन्होंने बताया कि किस प्रकार रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर चयनित औषधियों से प्रभावी परिणाम प्राप्त हुए। वहीं डॉ. रूपाली जिंदल ने हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्याओं के होम्योपैथिक उपचार पर अपना शोध प्रस्तुत किया, जिसमें बिना दुष्प्रभाव के दीर्घकालिक उपचार की संभावनाओं को उजागर किया गया। दोनों शोधपत्रों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सराहा और इन्हें भविष्य के शोध के लिए उपयोगी बताया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा किए अनुभव
भारत लौटने के बाद शहर के एक रेस्तरां में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किए। डॉ. कमल जिंदल ने कहा कि “हाउस ऑफ लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मंच पर अपने शोध को प्रस्तुत करना और सम्मान प्राप्त करना हमारे लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है।” उन्होंने कहा कि यहां विभिन्न देशों के विशेषज्ञों से संवाद कर हमें नई चिकित्सा दृष्टियों को समझने का अवसर मिला।
डॉ. रूपाली जिंदल ने बताया कि सम्मेलन में होम्योपैथी को लेकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल देखने को मिला और उनके शोध को जिस तरह सराहा गया, वह भारतीय चिकित्सा पद्धति की स्वीकृति का प्रमाण है।डॉ. रूपाली जिंदल ने बताया कि सम्मेलन में होम्योपैथी के प्रति वैश्विक स्तर पर सकारात्मक रुझान देखने को मिला और विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के साथ संवाद से नई जानकारियां प्राप्त हुईं। डॉ. जिंदल दंपत्ति ने बताया कि सम्मेलन में आधुनिक शोध पद्धतियों, डिजिटल केस स्टडी और इंटीग्रेटेड चिकित्सा प्रणाली पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों से उन्हें अपने मरीजों को और बेहतर एवं वैज्ञानिक आधार पर उपचार देने की प्रेरणा मिली है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच भारतीय होम्योपैथी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और भविष्य में भी वे इस दिशा में कार्य करते रहेंगे।
22 देशों में गूंजा जिंदल दंपत्ति का शोध कार्य
शहर के प्रख्यात होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. कमल जिंदल और डॉ. रूपाली जिंदल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। दोनों चिकित्सक अब तक 22 विभिन्न देशों में जाकर होम्योपैथी से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। उनके इन शोध कार्यों को न केवल व्यापक सराहना मिली है, बल्कि कई स्थानों पर इनके सकारात्मक और सुखद परिणाम भी देखने को मिले हैं। जिंदल दंपत्ति के शोध ने होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाने और इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत उनके सभी शोध पत्रों को विशेषज्ञों और चिकित्सा समुदाय द्वारा सराहा गया है, जिससे भारतीय होम्योपैथी को वैश्विक पहचान मिली है।
जिंदल परिवार की नई पीढ़ी भी होम्योपैथी में सक्रिय
शहर के वरिष्ठ होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. कमल जिंदल के पुत्र डॉ. नििकत मणि जिंदल (MBBS) भी चिकित्सा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। डॉ. निकित मणि जिंदल वर्तमान में लंदन कॉलेज ऑफ होम्योपैथी से होम्योपैथी की डिग्री प्राप्त करने के लिए अध्ययनरत हैं। अपनी पढ़ाई पूर्ण करने के बाद वे एक होम्योपैथिक फिजिशियन के रूप में सेवाएं देंगे। जिंदल परिवार की नई पीढ़ी का इस क्षेत्र में कदम रखना न केवल परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएगा, बल्कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को और मजबूती प्रदान करेगा। गौरतलब है कि डाॅ. कमल जिंदल के पिता जी स्व. डॉ. एस.आर. जिंदल ने भी नैशनल कॉलेज सिरसा से सेवानिवृत्त होकर सिरसा के पहले होम्योपैथी चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं दी थी।
सिरसा शहर के वरिष्ठ होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. कमल जिंदल और डॉ. रूपाली जिंदल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उत्कृष्ट उपस्थिति दर्ज कराते हुए भारत का नाम रोशन किया है। दोनों चिकित्सकों ने लंदन में आयोजित प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय होम्योपैथी सम्मेलन में भाग लिया, जिसका आयोजन लंदन कॉलेज ऑफ होम्योपैथी एवं एशियाई होम्योपैथिक लीग के के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
सम्मेलन के दौरान डॉ. कमल जिंदल और डॉ. रूपाली जिंदल को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य और होम्योपैथी के क्षेत्र में योगदान के लिए आयोजकों द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बना।
शोधपत्रों को मिली सराहना
डॉ. कमल जिंदल ने एलोपेसिया (बाल झड़ने) के होम्योपैथिक उपचार पर आधारित अपनी केस स्टडी प्रस्तुत की। इस शोध में उन्होंने बताया कि किस प्रकार रोगी के व्यक्तिगत लक्षणों के आधार पर चयनित औषधियों से प्रभावी परिणाम प्राप्त हुए। वहीं डॉ. रूपाली जिंदल ने हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी समस्याओं के होम्योपैथिक उपचार पर अपना शोध प्रस्तुत किया, जिसमें बिना दुष्प्रभाव के दीर्घकालिक उपचार की संभावनाओं को उजागर किया गया। दोनों शोधपत्रों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सराहा और इन्हें भविष्य के शोध के लिए उपयोगी बताया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा किए अनुभव
भारत लौटने के बाद शहर के एक रेस्तरां में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों चिकित्सकों ने अपने अनुभव साझा किए। डॉ. कमल जिंदल ने कहा कि “हाउस ऑफ लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मंच पर अपने शोध को प्रस्तुत करना और सम्मान प्राप्त करना हमारे लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है।” उन्होंने कहा कि यहां विभिन्न देशों के विशेषज्ञों से संवाद कर हमें नई चिकित्सा दृष्टियों को समझने का अवसर मिला।
डॉ. रूपाली जिंदल ने बताया कि सम्मेलन में होम्योपैथी को लेकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल देखने को मिला और उनके शोध को जिस तरह सराहा गया, वह भारतीय चिकित्सा पद्धति की स्वीकृति का प्रमाण है।डॉ. रूपाली जिंदल ने बताया कि सम्मेलन में होम्योपैथी के प्रति वैश्विक स्तर पर सकारात्मक रुझान देखने को मिला और विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के साथ संवाद से नई जानकारियां प्राप्त हुईं। डॉ. जिंदल दंपत्ति ने बताया कि सम्मेलन में आधुनिक शोध पद्धतियों, डिजिटल केस स्टडी और इंटीग्रेटेड चिकित्सा प्रणाली पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इन अनुभवों से उन्हें अपने मरीजों को और बेहतर एवं वैज्ञानिक आधार पर उपचार देने की प्रेरणा मिली है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच भारतीय होम्योपैथी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और भविष्य में भी वे इस दिशा में कार्य करते रहेंगे।
22 देशों में गूंजा जिंदल दंपत्ति का शोध कार्य
शहर के प्रख्यात होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. कमल जिंदल और डॉ. रूपाली जिंदल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं। दोनों चिकित्सक अब तक 22 विभिन्न देशों में जाकर होम्योपैथी से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं। उनके इन शोध कार्यों को न केवल व्यापक सराहना मिली है, बल्कि कई स्थानों पर इनके सकारात्मक और सुखद परिणाम भी देखने को मिले हैं। जिंदल दंपत्ति के शोध ने होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ाने और इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत उनके सभी शोध पत्रों को विशेषज्ञों और चिकित्सा समुदाय द्वारा सराहा गया है, जिससे भारतीय होम्योपैथी को वैश्विक पहचान मिली है।
जिंदल परिवार की नई पीढ़ी भी होम्योपैथी में सक्रिय
शहर के वरिष्ठ होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. कमल जिंदल के पुत्र डॉ. नििकत मणि जिंदल (MBBS) भी चिकित्सा क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। डॉ. निकित मणि जिंदल वर्तमान में लंदन कॉलेज ऑफ होम्योपैथी से होम्योपैथी की डिग्री प्राप्त करने के लिए अध्ययनरत हैं। अपनी पढ़ाई पूर्ण करने के बाद वे एक होम्योपैथिक फिजिशियन के रूप में सेवाएं देंगे। जिंदल परिवार की नई पीढ़ी का इस क्षेत्र में कदम रखना न केवल परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाएगा, बल्कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को और मजबूती प्रदान करेगा। गौरतलब है कि डाॅ. कमल जिंदल के पिता जी स्व. डॉ. एस.आर. जिंदल ने भी नैशनल कॉलेज सिरसा से सेवानिवृत्त होकर सिरसा के पहले होम्योपैथी चिकित्सक के रूप में अपनी सेवाएं दी थी।