हरियाणा में बढ़ रहा है ठंड का प्रकोप, आगे ऐसा रहेगा मौसम, प्रदेश की नायब सरकार ने शीतलहर व पाले से बचने के लिए जारी की एडवाइजरी

 
mahendra india news, new delhi

हरियाणा प्रदेश में पिछले कई दिनों से लगातार शीतलहर चलने से ठंड का असर बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार आने वाले समय में भ्भी ठंड का असर रहेगा। कृषि मौसम विज्ञान विभाग चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार ने मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। हरियाणा राज्य में मौसम आमतौर पर 8 जनवरी तक खुश्क रहने की संभावना है। 


इस दौरान वातावरण में नमी होने से उत्तर व दक्षिणी हरियाणा में ज्यादातर स्थानों पर अलसुबह व देर रात्रि को गहरी धुंध व कोहरा रहने परंतु पश्चिमी हरियाणा में हल्की से मध्यम धुंध रहने की संभावना है। इस दौरान दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना है तथा हवाओं में हल्का बदलाव रहने तथा  हल्की से मध्यम गति से शीत हवाएं चलने की भी संभावना है ।


प्रदेश सरकार ने मौसम को लेकर एडवाईजरी जारी की है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई "शीतलहर कार्य योजना" के अंतर्गत लोगों को सर्दी से बचाव के लिए प्रेरित किया गया तथा किसानों को फसल संबंधी जानकारी दी गई है।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त एवं सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि पिछले वर्ष जनवरी 2025 में चंडीगढ़, अंबाला, करनाल और हिसार में शीतलहर का प्रभाव देखने को मिला। इसी प्रकार की स्थिति वर्ष 2026 के प्रथम सप्ताह में देखने को मिल रही है।

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जब मैदानी क्षेत्रों में वास्तविक न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या इससे कम तथा पहाड़ी क्षेत्रों में शून्य डिग्री के आसपास रहता है तो उसे शीतलहर की श्रेणी में रखा जाता है। उन्होंने घर के अंदर कोयला या अंगीठी जलाने से बचने की सलाह देते हुए कहा कि बंद स्थानों में कार्बन मोनोआक्साइड गैस उत्पन्न होकर जानलेवा साबित हो सकती है। पालतू जानवरों, मवेशियों एवं घरेलू पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उन्हें घर के अंदर रखें।

हाइपोथर्मिया की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति को गर्म स्थान पर ले जाने की सलाह देते हुए सुमिता मिश्रा ने कहा कि शीतलहर के कारण गेहूं व जौ में काला रतुआ, सरसों व सब्जियों में सफेद रतुआ तथा आलू-टमाटर में लेट ब्लाइट जैसी बीमारियां फैल सकती हैं।

किसान बोर्डो मिश्रण या कापर आक्सी-क्लोराइड का छिडक़ाव करें तथा फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करें। शीतलहर के दौरान हल्की एवं बार-बार सतही सिंचाई करें और जहां संभव हो स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाएं। शीतलहर के दौरान मिट्टी में पोषक तत्व न डालें, क्योंकि ठंड के कारण जड़ों की गतिविधि कम हो जाती है और पौधे उन्हें अवशोषित नहीं कर पाते।