धर्मांतरण विधेयक का उद्देश्य अनैतिक प्रथाओं और धर्म के दुरुपयोग को रोकना है: मा. रामप्रसाद

 

mahendra india news, new delhi
सिरसा। चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के टैगोर भवन में सर्वधर्म उत्थान सेवा न्यास हरियाणा हिसार विभाग द्वारा हरियाणा विधिविरूद्ध धर्म परिवर्तन निवारण अधिनियम-2022 पर संगोष्ठि आयोजित की गई। संगोष्ठि में बतौर मुख्य वक्ता मा. रामप्रसाद (अखिल भारतीय विधि प्रमुख, धर्म जागरण समन्वय) रहे।


दीप प्रज्जवलन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य वक्ता मा. रामप्रसाद ने कहा कि धर्मांतरण विधेयक हरियाणा में अभी पारित हुआ है, जिसके तहत वे पूरे प्रदेश में भ्रमण कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में हिंदुओं की आबादी घट रही है मुसलमानों की बढ़ रही है। प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य केवल बल, धोखाधड़ी या प्रलोभन के माध्यम से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।

मा. रामप्रसाद ने कहा कि विधानसभा में 13 मार्च को पेश किए गए इस विधेयक में विवाह की आड़ में किए जाने वाले गैरकानूनी धर्मांतरण के लिए सजा के साथ-साथ  जुमार्ने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और झारखंड समेत कई राज्यों ने पहले ही इसी तरह के कानून बनाये हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत प्रदत्त धर्म का पालन करने के व्यक्ति के अधिकार को प्रतिबंधित नहीं करता है।

धर्म के अधिकार में किसी अन्य व्यक्ति को जबरदस्ती, गलतबयानी, धोखाधड़ी या प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरित करने का अधिकार शामिल नहीं है। इस दौरान उन्होंने उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का भी हवाला दिया। वक्ता ने कहा कि केवल गैरकानूनी धर्मांतरण के उद्देश्य से किए गए विवाहों को न्यायालय द्वारा अमान्य घोषित किया जा सकता है।

इस विधेयक का उद्देश्य अनैतिक प्रथाओं और धर्म के दुरुपयोग को रोकना है जो व्यक्तियों या समुदायों को नुकसान पहुंचाते हैं। विभाग संयोजक दिनेश सिंघानियां ने आए हुए प्रबुद्धजनों का स्वागत किया। इस मौके पर राजकुमार आईटीआई, पुखराज चौहान, दर्शन चावला, अविनाश बजाज, पुनीत गर्ग, मनोज भारत, नीरज मरोदिया, डा. जगदीश यशपाल शोरगर, मनीष नुहियांवाली, आत्मारा नुहियांवाली, संजय मेहता  एडवोकेट, ममता गोयल, संजू बाला एडवोकेट, बीबो रानी, गोविंद समाग सहित अन्य गणमान्जन उपस्थित थे।