इमरजेंसी की प्रताड़ना को देशवासी कभी नहीं भूल सकते: प्रो. गणेशीलाल
mahendra india news, new delhi
देश के अंदर नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर, जिन्होंने गीतांजलि लिखा। जन-गण अधिनायक जय है ये भी लिखा, लेकिन इमरजेंसी के नाम में। कांग्रेस के प्रेजिडेंट का नारा जनतंत्र भी लुप्त, गणतंत्र भी लुप्त और मनतंत्र भी लुप्त। मनतंत्र क्या होता है? ऐसा षड्यंत्र बुना गया कि जो मन तंत्र होता है, जो आधार है दिव्य प्रेम का और दिव्य संगीत का कॉस्मिक म्यूजिक का वो धराशायी हो गया। वो संगीत भी धराशायी हो गया। उपरोक्त बातें उड़ीसा के पूर्व राज्यपाल प्रो. गणेशीलाल ने भाजपा सरसाई कमल कार्यालय में बुधवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने बताया कि उस समय प्रेस को भी कंट्रोल कर रेंगने पर मजबूर कर दिया गया। जिससे उसकी स्वतंत्रता को छीन लिया गया।
प्रो. गणेशीलाल ने कहा कि इमरजेंसी का आपातकाल जो है, अनुशासन पर्व बन गया। अनुशासन, राष्ट्रपति का अनुशासन, संतों का अनुशासन, प्रेस का अनुशासन इस प्रकार की बात कही जाने लगी, लेकिन देश के अंदर से हम सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि जहां आदमी का मन बगैर किसी डर के हो, जहां आदमी स्वाभिमान से अपना सिर ऊपर कर कर चल सके। सारी की सारी बातें जो गीतांजलि में लिखी गई थी। ऐसा लगता था की नोबल प्राइस विनर का जो स्वपन था, भारत के बारे में उस स्वपन को भी धराशायी कर दिया गया। इस आपातकाल में कैसे-कैसे डर थे, उसकी कल्पना नहीं कर सकते। इतना भयानक डर था कि कोई आदमी दूसरे से बातचीत करते समय भी घबराता था। अगर बातचीत करता था तो चाटूकारिता के आधार पर करता था, डर के मारे करता था, जहां भय रहता है वहां संगीत कैसा? वहां प्रेम कैसा? इसलिए आप कह सकते हैं प्रेम की गंगा सूख गई थी। प्रो. गणेशीलाल ने कहा कि यह भी सच है की उस समय जिन लोगों ने सत्याग्रह किए, गिरफ्तारियां दी, पीड़ाएं सही, दुनिया भर के हर जुल्म सहे, उसका कल्पना नहीं कर सकते। उस समय तो स्वागत करने के लिए जो सत्याग्रह करते थे, उसका स्वागत करने के लिए भी कोई आता नहीं था।
इमरजेंसी का जो पीरियड था इतना भयानक था कि मेरे साथ मेरे एक मित्र थे। मेरे एक पड़ोसी दोस्त कॉमर्स प्रोफेसर को मीसा लगा कर गिरफ्तार कर लिया गया शायद हिंदुस्तान की वो पहला गिरफ्तारी थी। लोगों में हाहाकार मच गया कि इसको क्यों पकड़ लिया? प्रोफेसर का दोस्त है इसलिए इसको पकड़ लिया। मेरे घर की लाइब्रेरी से पुस्तकें उठा ली गई व रोड़ी बाजार स्थित मेरे निवास शांति निवास को सील कर दिया गया। पुस्तकें जला दी गई। उन्होंने कहा कि यहां पर चौधरी बंसीलाल का राज था। उस समय संजय गांधी व बंसीलाल ऐसे तीन चार नाम चलते थे, जिनके नारे चलते थे और जितने भी हिंदुस्तान के बड़े-बड़े नेता थे, सबको ऐसा लगता था हरियाणा के अंदर चौधरी बंसीलाल संभाल लेंगे। पार्टी का कोई संविधान नहीं और न ही मैनिफेस्टो। जेल में बनी उस पार्टी ने फिर कांग्रेस को डिफीट कर दिया।
इंदिरा गांधी राजनारायण से चुनाव हर गई। पूरे देश के अंदर उत्तर भारत में तो कांग्रेस को एक भी सीट नहीं आई। कांग्रेस पार्टी भी पूरी तरह से टूट गई। मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। आप कह सकते हैं कि वो समय टेररिज्म का था, आतंकवाद का था, आजकल आतंकवाद का नाम लिया जा रहा है, कांग्रेस खत्म की जा रही है, कांग्रेस मुक्त भारत बनना चाहिए, ऐसा दोष लगाते हैं। लेकिन वास्तव में कांग्रेस को मुक्त करने वाली तो कांग्रेस खुद ही है। हम लोग डंके की चोट से सत्याग्रह के लिए जेल में जाते थे, जेल में गए थे और बड़ा मस्ती में रहते थे, खूब अच्छे से गुजारते थे और हमको विश्वास था और हमको ये विश्वास था कि हर हालत में लोकतंत्र की, लोकशाही की लोकराज की स्थापना होगी, लोकराज फिर से आएगा और ऐसा हुआ। इस मौके पर जिला अध्यक्ष यतींद्र सिंह, मनीष सिंगला, जिला महामंत्री अंबर कुमार, डा. गंगासागर केहरवाला, वीरेंद्र तिन्ना, विष्णु शर्मा, कपिल सोनी एडवोकेट, सुमन शर्मा, सुमन सैनी, अंग्रेज सिंह सहित अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।