ग्रामीण भारत के विकास में मीडिया की भूमिका अहम: सीडीएलयू में राष्ट्रीय कार्यशाला
mahendra india news, new delhi
विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए ग्रामीण भारत की बदलती जनसांख्यिकी, सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं और विकास की चुनौतियों को समझना आवश्यक है। मीडिया इन बदलावों को जनमानस तक पहुंचाने तथा ग्रामीण समुदायों की आवाज को नीति निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह विचार चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर रूरल स्टडीज द्वारा टैगोर भवन स्थित टैगोर लेक्चर थिएटर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में उभरकर सामने आया।
डेमोग्राफिक शिफ्टस एंड द मीडिया: एनविजनिंग रूरल भारत इन द मार्च टुवर्ड्स विकसित भारत @ 2047 विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में ग्रामीण भारत की बदलती जनसांख्यिकीय संरचना, रोजगार के लिए पलायन, सामाजिक-आर्थिक प्रभावों तथा ग्रामीण समुदायों के लिए भविष्य की नीतिगत प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार ने की। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रसार भारती में वर्तमान कंसल्टिंग एडिटर राकेश आर्य मुख्य अतिथि रहे, जबकि लीगल इंडिया डॉट कॉम के संस्थापक भारत भूषण ने मुख्य वक्ता के रूप में विचार प्रस्तुत किए।
मुख्य अतिथि राकेश आर्य ने कहा कि भारत की बदलती जनसांख्यिकी ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जनसंख्या संरचना, रोजगार के अवसरों और पलायन के बदलते स्वरूप का ग्रामीण समाज तथा अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि मीडिया को इन परिवर्तनों की तथ्यपरक और संवेदनशील रिपोर्टिंग करते हुए ग्रामीण समुदायों की समस्याओं, आकांक्षाओं और उपलब्धियों को प्रमुखता देनी चाहिए। इससे ग्रामीण मुद्दों पर जन-जागरूकता बढ़ने के साथ नीतिगत निर्णयों के लिए भी सार्थक संवाद का मार्ग प्रशस्त होता है।
कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जनसांख्यिकीय बदलावों और मीडिया की भूमिका पर अकादमिक विमर्श वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ग्रामीण भारत की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को समझकर ही विकास की प्रभावी रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि शोध, नवाचार और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विमर्श के माध्यम से वे समाज की समस्याओं के समाधान में भी योगदान देते हैं। ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों और शोधार्थियों को समकालीन चुनौतियों की समझ प्रदान करने के साथ उनकी विश्लेषणात्मक क्षमता को भी मजबूत करती हैं।
मुख्य वक्ता भारत भूषण ने कहा कि मीडिया केवल सूचनाओं के प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और जनसंवाद का प्रभावी साधन भी है। ग्रामीण भारत की चुनौतियों, जनसांख्यिकीय बदलावों और पलायन से जुड़े मुद्दों को व्यापक विमर्श में स्थान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समुदायों की वास्तविक परिस्थितियों और स्थानीय आवाजों को प्रभावी मंच प्रदान करके मीडिया विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में सार्थक योगदान दे सकता है।
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि ग्रामीण विकास की योजनाओं को स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों, मानव क्षमता और बदलती सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। युवाओं के पलायन, रोजगार की संभावनाओं, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के समान अवसरों तथा सामाजिक परिवर्तन जैसे विषयों को समझना भविष्य की नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला के संयोजक एवं यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर रूरल स्टडीज के निदेशक डॉ. रविंद्र ने मुख्य अतिथि तथा मेहमानों का स्वागत किया। आयोजन सचिव डॉ. अमित ने कार्यशाला की विषयवस्तु और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला जबकि विभाग के शोधार्थी आकाश ने प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन डॉ प्रियंका ने किया। इस अवसर पर डॉ टिम्सी, डॉ कृष्ण, डॉ विकास सहित विद्यार्थी उपस्थित थे।