शनिदेव की इन लोगों पर हमेशा रहती है कृपा, नहीं सताता शनि दोष और साढ़ेसाती का भय, इन गलतियों से नाराज होते हैं शनि देव

 
mahendra india news, new delhi

आज 4 अप्रैल को शनिवार है। शनिवार का दिन भगवान शनि को समर्पित रहता है। विधि विधान से शनिदेव की पूजा करने से भगवान की हमेशा कृपा बनी रहती है। वैसे देखे तो अक्सर कई व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा का नाम सुनते ही भयभीत हो जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है शनि देव की दृष्टि सभी के लिए हानिकारक नहीं होती। शनि देव 'दंडनायक' होने के साथ-साथ 'कर्मफलदाता' भी कहलाते हैं, इसका अर्थ है कि वह लोगों को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं।

इन व्यक्तियों पर मेहरबान रहते हैं शनिदेव
ज्योतिषचार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि भगवान शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। ऐसे में अगर  कर्म शुद्ध व अच्छे हैं, तो शनि की महादशा भी आपके लिए राजयोग लेकर आ सकती है। जो व्यक्ति ईमानदारी और सेवा का रास्ता चुनता है और कभी किसी दूसरे लोगों का हक नहीं मारता, शनि देव उनकी रक्षा करते हैं। 

इसी के जो व्यक्ति बुजुर्गों का सम्मान करता है और अपने मां बाप की सेवा करते है, उसे भी शनिदेव कभी कष्ट नहीं देते।

भगवान बाला जी की भक्ति से मिलता है लाभ
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, रावण की कैद से मुक्त कराने के बाद शनिदेव ने बालाजी हनुमान जी को यह वचन दिया था कि वह हनुमान जी के भक्तों को कभी कष्ट नहीं पहुचाएंगे। ऐसे में जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान हनुमान जी की भक्ति करता है, उसे शनि दोष का भय नहीं सताता। इसके साथ ही आप शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ या हनुमान चालीसा का जप करके भी शनि दोष से राहत पा सकते हैं।

इन कार्यों से भी मिलती है शनि देव की कृपा
ज्योषितचार्य पंडित लालचंद ने बताया कि जो साधक सात्विक जीवन को अपनाते हैं और मांस-मदिरा से दूर रहते हैं, उन्हें भी उनके लिए भी शनि की 'वक्र दृष्टि' का प्रभाव कम होता है। इसी के साथ ही शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक भी जला सकते हैं, जो शनिदेव की कृपा प्राप्ति का एक उत्तम तरीका है। पीपल के पेड़ में त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा करने से शनि की पीड़ा कम होती है।

इन गलतियों से नाराज होते हैं शनि देव
शनिदेव उन लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं करते, जो दूसरों के लिए परेशानी पैदा करते हैं।
इसी के साथ ही गरीबों, महिलाओं और असहाय लोगों का हक छीनने वालों को भी शनिदेव कठोर दंड देते हैं।
वहीं अपने गुरुओं का अपमान करने वाले व्यक्ति को शनिदेव की नाराजगी झेलनी पड़ती है।
जो लोग दूसरों के पीठ पीछे बुराई करते हैं या अदालत में झूठी गवाही देते हैं, उन्हें भी शनिदेव कभी माफ नहीं करते।
जो व्यक्ति बेजुबान जानवरों (खासकर कुत्तों और कौओं) को सताते हैं, उनसे शनिदेव जल्दी रुष्ट हो जाते हैं।