खरीफ सीजन में ग्वार की बिजाई के लिए यह समय सबसे उपयुक्त, ग्वार की इन किस्मों की बिजाई करें किसान
खरीफ सीजन में बहुत से किसान ग्वार की बिजाई करते हैं। ग्वार की फसल के सही समय पर बिजाई, बीजोपचार, संतुलित खाद का प्रयोग व अनावष्यक खरपतवारनाशक संबंधित जानकारी आपको दें रहे हैं। डा. देवेंद्र जाखड़ ने किसानों को सलाह दी किसी भी फसल की बिजाई से पहिले अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं तथा खाद का उपयोग मिट्टी की जांच के आधार पर करें।
कैसे करें बीज का उपचार:
डा. देवेंद्र जाखड़ ने जडग़लन रोग की रोकथाम व इसके इलाज अपनाने पर किसानों पर जोर दिया। इस बीमारी की रोकथाम के लिए 3 ग्राम कार्बन्डाजिम 50 फीसद (बेविस्टीन) प्रतिकिलो बीज की दर से सुखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जडग़लन रोग का इलाज मात्र 15 रूपये बीज उपचार से संभव है। ऐसा करने से करीबन 1.0-1.5 क्ंिवटल प्रति एकड़ ग्वार की पैदावार बढ़ जाती है।
कौन सी किस्में बीजें:
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नतशील किस्में एचजी 365, एचजी 563 व एचजी 2-20 की बिजाई करने की सलाह दी। ये किस्में 85 से 115 दिन में पककर तैयार हो जाती। अत: किसानों को सलाह दी जाती है कि ग्वार कि किस्म एचजी 2-20 की बिजाई 10 से 20 जून के बीच में पूरी कर लें क्योंकि यह पकने में 10-15 दिन अधिक समय लेती है। इसके साथ-साथ किसानों को सलाह दी जाती है कि किस्म एचजी 2-20 हल्की जमीन में न लगाएं। किस्म एचजी 365 व एचजी 563 किस्म की बिजाई 10 से 30 जून के बीच में कभी भी कर सकते हैं।
बिजाई का उचित वक्त
ग्वार की बिजाई मानसून की बारिश आने से पहले कुछ रकबे में पानी लगाकर रिस्क को कम करने के लिए पलेवा करके अब बिजाई शुरू कर सकते हैं अब ग्वार की बिजाई का उचित समय आ गया है। बारिश पर आधारित बिजाई मानसून की अच्छी बारिश आने पर करें।
संतुलित खाद का प्रयोग:
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से आग्रह किया अच्छी पैदावार लेने के लिए 100 किलो सिंगल सुपरफास्फेट तथा 15 किलो यूरिया या 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालने के लिए सलाह दी। ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए अपने खेत में गोबर की खाद अवश्य डालें इससे जमीन की उर्वराशक्ति बनी रहेगी।