शाह सतनाम जी कॉलेज में महिला सशक्तिकरण पर तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू आईक्यूएसी के माध्यम से संस्कृति, विरासत व कौशल विकास पर जोर, योग, डिजिटल लिटरेसी व कला-शिल्प का दिया प्रशिक्षण

Three-day workshop on women empowerment started at Shah Satnam Ji College. Emphasis on culture, heritage and skill development through IQAC. Training given in yoga, digital literacy and arts and crafts.

 
 

 सिरसा। शाह सतनाम जी कॉलेज आॅफ एजुकेशन, सिरसा में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के सौजन्य से वीरवार को तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। कार्यशाला का विषय एम्पावरिंग वूमेन थ्रू आईकेएस: ब्रिजिंग कल्चर, हेरिटेज एंड स्किल डेवलपमेंट रखा गया है, जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान प्रणाली के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना है। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती हिमानी तूर, प्रशासिका डॉ. चरणप्रीत कौर, प्राचार्या डॉ. रजनी बाला व अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

कार्यक्रम का संचालन एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मीनाक्षी ने किया। इस अवसर पर प्रशासिका व प्राचार्या ने मुख्य अतिथि, विशेषज्ञों एवं उपस्थित मेहमानों का स्वागत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण कला है, जो सदियों से समाज का मार्गदर्शन करती आ रही है। कार्यशाला में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा से सहायक प्रोफेसर डॉ. गुरप्रीत कौर (फैशन डिजाइनिंग), डॉ. महक (कंप्यूटर एवं इंजीनियरिंग विभाग), योग प्रशिक्षक कर्मदीप कौर तथा कला एवं शिल्प प्रशिक्षक श्रीमती आरती रानी विशेषज्ञ के रूप में मौजूद रहे। प्रथम दिन के सत्र में योग प्रशिक्षक कर्मदीप कौर ने ताड़ासन, वृक्षासन, गरुड़ासन, पद्मासन, पर्वतासन, सूर्य नमस्कार व प्राणायाम (अनुलोम-विलोम) आदि योगाभ्यास करवाते हुए स्वस्थ जीवनशैली व संतुलित आहार के महत्व पर प्रकाश डाला।

वहीं आरती रानी ने पारंपरिक एवं आधुनिक सजावटी व उपयोगी वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया। डॉ. गुरप्रीत कौर ने कपड़ों की कटिंग, सिलाई, कढ़ाई व मेजपोश बनाने की तकनीकों से अवगत कराया। डॉ. महक ने विद्यार्थियों को कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान, डिजिटल लिटरेसी फ्रेमवर्क तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के बारे में पीपीटी के माध्यम से जानकारी दी।
मुख्य अतिथि श्रीमती हिमानी तूर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं समय-समय पर आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली हमारी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान का अहम हिस्सा है। महिलाओं का सशक्तिकरण केवल आर्थिक नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मविश्वास और अधिकारों से भी जुड़ा है। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक कौशल के समन्वय से महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित होते हैं, जिससे वे आशाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज में राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन
- खेल व शारीरिक फिटनेस पर विशेषज्ञों ने रखे विचार, 200 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया भाग


सिरसा। शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज, सिरसा में आधुनिक युग में खेल और शारीरिक फिटनेस: उभरती चुनौतियां और नए अवसर विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह सम्मेलन हाइब्रिड मोड में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से शिक्षाविदों, शोधार्थियों, खिलाड़ियों और विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा महाविद्यालय स्तुति गान के साथ हुई, जिससे पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया गया और सम्मेलन के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।


              चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के कुलगुरु प्रो.डॉ. विजय कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों का केवल बौद्धिक रूप से ही नहीं, बल्कि शारीरिक रूप से भी मजबूत होना आवश्यक है। खेल गतिविधियां विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना का विकास करती हैं, जो जीवन में सफलता के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने युवाओं से नियमित रूप से खेलों और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। मुख्य अतिथि ने आगे कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने विचार साझा करने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं और उन्हें नई दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कॉलेज द्वारा किए गए इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं


                      सम्मेलन के मुख्य वक्ता प्रो.डॉ. सुशील लेगा, शारीरिक शिक्षा विभाग, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने खेल विज्ञान और फिटनेस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त दूसरे सत्र में डॉ. संजीव कुमार, विभागाध्यक्ष, शारीरिक शिक्षा विभाग, पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा ने खेल शिक्षा में नई तकनीकों और बदलते परिदृश्य पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की आवश्यकता बन चुका है। सम्मेलन की विशेषता यह रही कि इसमें 200 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। तकनीकी सत्रों के दौरान खेल विज्ञान, मानसिक स्वास्थ्य, योग, फिटनेस प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत विचारों ने सम्मेलन को ज्ञानवर्धक और शोधपरक बना दिया। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट शोध कार्य और प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए रिसर्च स्कॉलर प्रमोद बांगर को बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया।

मंच संचालन डॉ. बाबूलाल तथा एमएजेएमसी के विद्यार्थी दिव्यांश द्वारा प्रभावी ढंग से किया गया। समापन सत्र में सम्मेलन की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की गई तथा प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया। प्रतिभागियों ने इस आयोजन को अत्यंत उपयोगी, प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक बताया। अंत में धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिलावर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे राष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अपने विचार व्यक्त करने का मंच प्रदान करते हैं और उन्हें नई सोच विकसित करने के लिए प्रेरित करते हैं।

उन्होंने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थान की प्रबंधन समिति के सदस्य रिटायर्ड कर्नल नरेंद्र पाल सिंह तूर, आर.के. बजाज, आर.के. चौहान, कॉलेज एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. शशि आनंद, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सुमित सिंगला, डॉ. बाबूलाल, अमित कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।त्मनिर्भर बनती हैं और हमारी संस्कृति व विरासत भी सुरक्षित रहती है। कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।