CDLU SIRSA में एक सराहनीय और प्रेरणादायी पहल के माध्यम से फ़रवरी माह के दिनों को अन्नपूर्णा सप्ताह के रूप में मनाया
mahendra india news, new delhi
जहाँ एक ओर युवा वर्ग पाश्चात्य संस्कृति से प्रेरित वैलेंटाइन वीक की ओर आकर्षित हो रहा है, वहीं चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में एक सराहनीय और प्रेरणादायी पहल के माध्यम से फ़रवरी माह के इन सात दिनों को ‘अन्नपूर्णा सप्ताह’ के रूप में मनाया जा रहा है। यह सप्ताह न केवल सेवा और संवेदना का संदेश देता है, बल्कि समाज के वंचित वर्ग के प्रति उत्तरदायित्व का भी बोध कराता है।
सीडीएलयू के कुलगुरु प्रोफेसर विजय कुमार रे ने प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों द्वारा की जा रही इस सराहनीय पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं में सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
उन्होंने कहा कि अन्नपूर्णा सप्ताह जैसे आयोजन न केवल हमें आत्मबोध कराते हैं, बल्कि समाज के वंचित वर्ग के प्रति हमारे कर्तव्यों का भी स्मरण कराते हैं। कुलगुरु ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ राष्ट्रीय एकता, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और मानवीय दृष्टिकोण को मज़बूती प्रदान करती हैं तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं छात्र-छात्राओं द्वारा संयुक्त रूप से संचालित इस पहल का नेतृत्व म्यूजिक विभाग की प्राध्यापक डॉ. सरस्वती चतुर्वेदी एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की प्राध्यापक डॉ. टिम्सी मेहता कर रही हैं। अन्नपूर्णा सप्ताह के अंतर्गत प्रत्येक दिन निर्धन वर्ग के साथ खाद्यान्न एवं आवश्यक सामग्री साझा कर प्रसन्नता बाँटी जाती है। इस अभियान में विश्वविद्यालय के अनेक विद्यार्थी सक्रिय सहभागिता निभाते हुए इसे जनसेवा का उत्सव बना देते हैं।
डॉ. सरस्वती चतुर्वेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि अन्नपूर्णा सप्ताह के पहले दिन पुस्तक-पेंसिल दिवस मनाया जाता है, जिसमें नन्हे बच्चों को अध्ययन सामग्री वितरित की जाती है। दूसरे दिन आटा-चावल दिवस के रूप में राशन सामग्री प्रदान की जाती है। तीसरे दिन मिष्ठान्न दिवस पर यथाशक्ति मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं।
चतुर्थ दिवस को बिस्किट-नमकीन दिवस के रूप में मनाते हुए बच्चों के बीच विभिन्न खाद्य पदार्थ वितरित किए जाते हैं। छठे दिन हलवा दिवस के अवसर पर गरीब बच्चों के साथ हलवा बाँटा जाता है, जबकि सातवें और अंतिम दिन अन्नपूर्णा दिवस पर अपनी क्षमता और रुचि के अनुसार खाद्यान्न ग़रीबों एवं गो-सेवा हेतु अर्पित किया जाता है।
डॉ. टिम्सी मेहता ने इस पहल की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन युवाओं को पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से हटकर भारतीय मूल्यों, सेवा-भाव और सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर प्रेरित करता है। ऐसे प्रयास समाज के वंचित वर्ग के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।इस सेवा अभियान में डॉ. दीपक कुमार सहित योगेश, मीनू, इशिता, योगविंदर, ललिता, मुस्कान, नीरू और कुणाल जैसे छात्र-छात्राएँ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। चार वर्षों से इस टीम का हिस्सा रहे छात्र योगेश ने बताया कि अन्नपूर्णा सप्ताह ने उन्हें समाज की वास्तविक पीड़ा को समझने और सामुदायिक कल्याण के महत्व को आत्मसात करने का अवसर दिया।
वहीं मीनू के अनुसार यह सप्ताह व्यक्तित्व निर्माण और आत्मिक जागरूकता का एक विशेष अनुभव है। मुस्कान ने भी इस पहल को अत्यंत सार्थक और प्रेरणादायी बताया।टीम के सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि वे भविष्य में भी इस मानवीय प्रयास से निरंतर जुड़े रहेंगे और समाजसेवा की इस परंपरा को आगे बढ़ाते रहेंगे।