आज वही कल है, जिस कल की फिक्र तुम्हे कल थी। यही आज, हमारा भविष्य होगा, जिसका हम चिंतन नहीं करते है
Mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
युवा विद्यार्थी दोस्तों, भविष्य की चिंता तो सभी करते है, चाहे वो बच्चें हो, चाहे वो किशोर हो या फिर युवा हो। हमारे सोचने का तरीका ही यही है कि या तो हम आने वाले कल की सोचते है या फिर बीते हुए कल की सोचते है क्योंकि उनके बारे में केवल सोचना ही होता है तथा आसान होता है, कुछ करना नहीं होता है, परंतु हम ना तो कल में जीते है और ना ही आने वाले कल अर्थात भविष्य वाले कल में जीवन जीते है, बल्कि हम तो वर्तमान में जीते है अर्थात आज में जीते है और जो भी संघर्ष, मेहनत, परिश्रम करना है वो आज में ही करना है। आज में जीने के लिए सोचना नहीं बल्कि करने की आवश्यकता होती है,
वर्तमान में कर्म प्रधान है। हमारे रोज के आज ही तो भूतकाल के कल बनते है और वही आज, आने वाले कल में परिवर्तित है, वो आज ही हमारा भविष्य बनता है। लेकिन ना तो हमने कभी इस विषय को गंभीरता से लिया और ना ही हमारे युवा विद्यार्थी इस बात को गंभीरता से लेते हैं। जिस आज को हम मौज मस्ती में गुजारते है वहीं आज हमारे सामने आने वाला कल बनकर भविष्य का रूप ले लेता है।
जब हम वर्तमान में मेहनत नहीं करते है, फिर किस्मत को कोसते है। हम रोज दस दस घंटे सोते है, सारा सारा दिन मोबाइल पर व्यस्त रहते है और फिर भगवान का नाम लेकर बहाने बनाते है, हमारी तो किस्मत ही खराब है, यही बहाने बनाते है। भविष्य का आधार तो आज ही होता है, किसी के भविष्य का बनना तो सदैव वर्तमान में ही होता है, जीवन तो वर्तमान में ही चरितार्थ होता है। मैं यहां युवा विद्यार्थियों को यही चेताना चाहता हूँ कि हमारे बच्चों को आज ही मेहनत करनी है, हर दिन तो आपके सामने आज के रूप में आएगा और वहीं मेहनत का आधार हैं, वहीं मेहनत वा लगन का प्लेटफॉर्म है। मेरे प्यारे बच्चों जो आज बीत गया वो तुम्हारी जिंदगी में कभी लौट कर नहीं आएगा, यानी अगर हम एक जनवरी 2026 की बात करे तो वो दिन एक बार गया तो वो आपके पूरे जीवन में कभी नहीं आएगा। इसलिए आज को सार्थक बनाने के लिए अपने मन को मजबूत करें।
भगवान श्रीकृष्ण जी महाराज ने श्रीमद्भगवद् गीता के छठे अध्याय के पांचवे श्लोक में कहा है कि" उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानम वास देयेत। आत्मैव ह्यूतमनो बंधुरतमैव रिपुरातमान:।।" अर्थात हर विद्यार्थियों को चाहिए कि वो अपने मन की सहायता से अपना उद्धार करे और अपने को नीचे ना गिरने दे। यह मन मनुष्य का मित्र भी है तथा शत्रु भी हैं। यहां युवाओं को अपने मन को प्रशिक्षित करना पड़ेगा। मैं अपनी छोटी सी बुद्धि से युवाओं को "आज " पर फोकस करने के लिए नौ सुझाव देना चाहता हूँ जिन्हें हमारे विद्यार्थियों को अपने जीवन में अपनाना होगा।
1. विद्यार्थियों को वर्तमान पर ध्यान करने का अभ्यास करना चाहिए। अपने आज पर ही फोकस करने के लिए विद्यार्थियों को अपनी जीवन शैली बदलने की जरूरत है।
2. अपने स्वास्थ्य को भी सशक्त करना होगा, उसके लिए विद्यार्थियों को अपने फूड तथा व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन वो भी आज ही ध्यान देना होगा, क्योंकि कल कभी भी कल के रूप में नहीं आता है।
3. किसी के बहकावे में ना आवे, क्योंकि आपके कुछ साथी आपके आज को बर्बाद करने में लगे रहते है। अपना आज का एक क्षण भी किसी के कहने से बेकार न करें। कभी आज घूमने जा रहे है, कभी आज डिनर करने जा रहे है, कभी आज मूवी देखने जा रहे है, कभी आज दोस्तों के साथ ड्राइविंग पर जा रहे है, कभी कभी पूरा आज मोबाइल देखने में गुजर जाता है, ऐसे दोस्तों को विद्यार्थी जीवन के दौरान ना ही कहने का हौंसला रखें।
4. अपनी आंतों अर्थात गट को स्वस्थ रखने के लिए दिन में एक बार फ़र्मेंटेड फूड जरूर खाएं, यानी कि कांजी पिए, इडली खाए, दही खाएं, या कोई भी अन्य फर्मेंटेड भोजन का अवश्य सेवन करें, क्योंकि हमारा गट दूसरा दिमाग है।
5. सभी विद्यार्थी अपने हर आज का शेड्यूल बनाए ताकि आज का उपयोग बेहतर ढंग से करें।
6. अपने मन को उत्साहित रखे और इसके लिए हर दिन प्रातः जल्दी उठकर वॉक करे, दौड़ लगाएं, प्राणायाम करें, तथा मेडिटेशन भी करें, प्राणायाम की कुंभक क्रिया जरूर करें।
7. नींद को पूरा करने के लिए जरूर प्लान बनाए और नींद का समय रात्रि 10 बजे से प्रातः 4 बजे तक रहे तो बहुत ही लाभकारी रहेगा।
8. अपनी एनर्जी को ना तो अधिक बोलकर गवाएं, ना अधिक भोजन करके गवाएं, ना सोशल मीडिया पर खराब करें।
9. अपनी जीवनशैली से मोबाइल को हर हाल में दूर करना होगा, अधिक से अधिक एक घंटा मोबाइल देखने में बेकार कर सकते है अन्यथा नहीं।
हमारे जीवन में केवल "आज" का ही महत्व है क्योंकि हर सुबह जब हम नींद से जागते है तो हमारे सामने आज ही होता है जिसको हम अंग्रेजी में टुडे बोलते है, बस उसी का उपयोग करने का अभ्यास करना है। किसी भी आज को बिना कुछ किए ही कल मत बनने देना, नहीं तो आने वाला कल, जिसे हम अपना भविष्य भी कहते है, बहुत ही अंधकार में चल जाएगा। फिर कोई कितना भी पछतावे या किस्मत को कोसे। इससे कुछ बदलने वाला नहीं है। ये आज कभी वापिस नहीं आएगा। सबकुछ आज में ही बदलेगा। इसलिए आज ही मेहनत करो, आज ही संकल्प करे, बहुत से आज के कर्म मिलकर किस्मत बनती है, इसलिए आज ही जिंदगी बदलने का प्रण लें।
जय हिंद, वंदे मातरम
यूथ डेवलपमेंट मेंटर