SIRSA में यूजीसी के समर्थन में विभिन्न संगठनों ने सौंपा ज्ञापन
Mahendra india news, new delhi
सिरसा। सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी कानून के समर्थन में लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी, हरियाणा के बैनर तले विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को जिला उपायुक्त को महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल के नाम सौंपे गए ज्ञापन में संगठन पदाधिकारियों रामस्वरूप धोलपालिया, दाऊद सिंह, रामजीलाल सैनी, सुरजीत ढाणी शेरां, सुखदेव सिंह ढाणी शेरां, महेंद्र सैनी, राजकुमार सैनी, मोहनलाल सैनी, हरीश सैनी, प्रेम सैनी, रजत सैनी, निरंजन सैनी, चिरंजीलाल सैनी, राजकुमार रोहलीवाल, डा. केसी कंबोज, मनीराम बहलान, हरियाणा पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर आरसी लिंबा, दलित समाज के वरिष्ठ नेता राजकुमार नागर ने संयुक्त रूप से बताया कि 13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने एक नया समता के संवद्र्धन से संबंधित विनियम-2026 लागू किया।
यह नियम भारत के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों पर लागू होता है और इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित और अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकना है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों एस सी व ओबीसी समुदाय के अभियर्थियों के साथ भेदभाव, उत्पीडऩ और असमान अवसरों से जुड़े मामलों में वृद्धि देखी गई। इससे न केवल अभियार्थियो का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धातों पर भी प्रश्नचिह्न लगे। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यूजीसी ने 2026 में यह नया कानून लागू किया। भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था में समानता, समावेशन और भेदभावमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका हम पुरजोर समर्थन करते हैं। यूजीसी कानून कमेटी को लेकर स्वर्ण समाज के लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं। यह कमेटी ओबीसी-एससी समाज के अभियर्थियों के लिए नौकरी व प्रमोशन में भेदभाव रोकने के लिए बनाई जा रही है,
इसको लेकर स्वर्ण समाज के लोग मिथ्या प्रचार कर रहे हैं कि इस कमेटी से ओबीसी समाज के लोग स्वर्ण समाज के लोगों को एससी एक्ट की तरह इस्तेमाल करेंगे, जबकि अभी यूजीसी कमेटी में निजी शिकायतों का कोई प्रावधान नहीं है। इसीलिए स्वर्ण समाज के लोग यूजीसी कमेटी रद्द करने का प्रयास कर रहे हैं। इस यूजीसी कमेेटी की सुरक्षा के लिए लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी पुरजोर समर्थन करती है और सरकार व राष्ट्रपति से मांग करती है कि इस यूजीसी कमेटी में एस सी, ओबीसी व एसटी और दिव्यांग, महिला व सोशल रिटायर्ड प्रोफेसर या समाजसेवी वर्ग से मेम्बर गठित होने हैं, परन्तु इसमें यह स्पष्ट नहीं है किस वर्ग से कितने-कितने मेम्बर होंगे,
प्रधानमन्त्री यह स्पष्ट करवाएं। साथ ही यह भी मांग करते हैं कि इस कमेटी में आधे से ज्यादा एस सी, एस टी, ओबीसी और माइनॉरिटी दिव्यांग वर्ग से मेम्बर शामिल किए जाएं, क्योंकि वर्चस्व यूनिवर्सिटी में स्वर्ण वर्ग के लोगों की संख्या और नेटवर्क ज्यादा है तो फिर जनरल कैटेगरी के साथ अन्याय कैसे हो सकता है। जबकि नियमों का उद्देश्य संस्थानों में भेदभावमुक्त और जवाबदेह शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना है। इसलिय लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी मांग करती है कि यूजीसी कमेटी में एस सी, एस टी व ओबीसी और माइनॉरिटी के मेम्बर की संख्या अधिक हो, ताकि अभियार्थियों को भेदभाव-मुक्त समानता, पारदर्शिता का बेहतर अकादमिक माहौल मिल सके।