वीटा मिल्क प्लांट, SIRSA गाय-भैंस के दूध के रेटों में की गई कटौती वापस ले: औलख
mahendra india news, new delhi
भारतीय किसान एकता BKE के प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने कहा है कि वीटा मिल्क प्लांट सिरसा द्वारा किसानों की बकाया पेमेंट को जानबूझकर रोका जा रहा है। औलख ने आरोप लगाया कि प्लांट के कार्यकारी सीईओ दिनेश मेहता बड़े ठेकेदारों पर मेहरबान हैं, जबकि छोटे किसानों और दूध उत्पादकों को लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े ठेकेदारों से बिना किसी गुणवत्ता जांच के दूध खरीदा जा रहा है और कथित रूप से प्रति लीटर 1 से 2 रुपये तक रिश्वत ली जा रही है, जबकि किसानों के भुगतान में जानबूझकर देरी की जा रही है।
BKE कार्यालय सिरसा में हुई बैठक में किसानों ने बताया कि वीटा प्लांट को हर महीने की 5, 15 और 25 तारीख को भुगतान करना होता है, लेकिन वर्तमान में भुगतान समय पर नहीं हो रहा। इसके अलावा 10 अप्रैल से दूध के रेट में कटौती कर दी गई है, जिससे किसानों को और नुकसान उठाना पड़ रहा है। पशु चारा तथा अन्य सभी उत्पादों में भयंकर तेजी है। इसके विपरीत दूध के रेट कम कर दिए गए हैं, जो कि पशुपालक किसानों के साथ अन्याय है।
औलख ने कहा कि कम सब्सिडी के रूप में पशुपालन किसानों को जो बोनस दिया जाता है, जिसपर सरकार अपने पीठ थपथपाती है कि हमने वीटा प्लांट से जुड़े हुए किसानों को दूध खरीद में बोनस दे दिया, लेकिन दूसरी तरफ वीटा मिल्क प्लांट द्वारा दूध के रेट में कटौती कर दी जाती है। रेट और बोनस मिलाकर भी बाजार से कम मूल्य पर किसानों से दूध खरीद जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बोनस राशि का लाभ भी छोटे कारोबारियों तक समय पर नहीं पहुंचता।
औलख ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट में भ्रष्टाचार के चलते उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने कहा कि मिलावटी दूध को भी कथित रूप से रिश्वत लेकर प्लांट में स्वीकार किया जा रहा है, जो बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने हाल ही में सामने आए एक मामले का हवाला देते हुए कहा कि 8 अप्रैल रात को एक ठेकेदार के दूध के टैंकर को निम्न क्वालिटी की वजह से रिजेक्ट कर दिया जाता है, लेकिन सीईओ दिनेश मेहता को ठेकेदार द्वारा मोटी रिश्वत देने के बाद नियमों के विरुद्ध मिलावटी दूध का टैंकर प्लांट में ही तौला गया।
इसके अतिरिक्त मिल्क प्लांट में चल रहे अन्य कार्यों में भी सरेआम भारी धांधली चल रही है। ठेकेदारों के साथ मिलकर इन अधिकारियों द्वारा मोटा पैसा कमाया जा रहा है तथा किसानों की इस संस्था को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ये अधिकारी पहले से ही भ्रष्ट हैं। पहले भी अधिकारियों द्वारा जेरनेटर खरीद घोटाला किया गया था, जिसकी विजिलेंस जांच चल रही है, जिसमें लाखों रुपए का गबन किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी डेयरी होने के कारण उपभोक्ताओं का विश्वास वीटा ब्रांड पर है, लेकिन कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से यह विश्वास टूट रहा है। कई ठेकेदार स्थानीय किसानों से दूध नहीं लेकर बाहरी स्रोतों से या अवैध तरीकों से दूध लाकर प्लांट में सप्लाई कर रहे हैं। बीकेई ने चेतावनी दी है कि यदि दूध के रेट में की गई कटौती वापस नहीं ली गई तथा जल्द से जल्द पशुपालक किसानों की सभी बकाया पेमेंट जारी नहीं की गई और व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो संगठन द्वारा वीटा मिल्क प्लांट सिरसा का घेराव कर जोरदार आंदोलन किया जाएगा।