युवाओं को आत्मविश्वास की जरूरत है, अंधविश्वास की नही

 

mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
अंधविश्वास, आत्मविश्वास का विरोधाभासी है, अंधविश्वास से उत्पन्न अंदर का विश्वास डर से पोषित होता है, इसलिए उसका सहारा जो भी युवा या विद्यार्थी लेगा, उसके व्यक्तित्व में भय एक महत्वपूर्ण अंश रहेगा, जिसे जानना  आज के युवाओं तथा विद्यार्थियों के लिए बहुत आवश्यक हैं। युवा साथियों कभी आप लोगो ने सोचा है कि अंधविश्वासी कौन बनता है , कौन आसान रास्ते ढूंढने का प्रयास करते हैं, केवल वो ही लोग शॉर्ट कट देखते है जो मेहनत करने में भरोसा नहीं करते हैं,

जो मेहनत से जी चुराते हैं, जो आलसी हैं, जिसे खुद के परिश्रम पर विश्वास नहीं है, वो ही तो टोने टोटके की तरफ बढ़ते हैं, वो ही तो पाखंड की तरफ बढ़ते हैं , वो ही तो ऐसे लोगों के पास जाते है जो बिना कुछ किए करियर बनाने की जिम्मेदारी लेते है। प्रिय विद्यार्थियों के उलझन है, इससे बचने की आवश्यकता है, क्योंकि ये क्रियाएं किसी भी व्यक्ति को कमजोर, बहुत कमजोर कर देती है। युवा साथियों और विद्यार्थियों , क्या आपने सोचा हैं कि अंधविश्वास और पाखंड क्या होता हैं ? अंधविश्वास और पाखंड वो है जो धरातल पर है ही नही, जो वास्तव में फिजूल की एक्सरसाइज है

जिससे किसी को कोई फायदा नही होता है केवल उनके, जो उस  पाखंड को रचते हैं, जो उस घटिया टैक्ट तथा उस पाखंड गतिविधियों को अंजाम देकर पैसे बनाने और लोगो को बेवकूफ बनाने का काम करते है।  उन पाखंडियों का तो काम ही यह हैं, कि युवा तथा विद्यार्थियों को रोज रोज डराएं, अंधविश्वास में डालने का काम करें। ऐसे कुछ पाखंडी पंथ के नाम पर , धर्म के नाम पर, सफलता के नाम पर, नौकरी के नाम पर, शादी के नाम पर , अच्छे स्वास्थ्य के नाम पर , कभी अशुभ ग्रह के नाम पर ,

तो कभी ग्रह की उल्टी चाल के नाम पर ना जाने कितने युवाओं और विद्यार्थियों को पाखंड वा अंधविश्वास में धकेल देते हैं, ना जाने कितने ही युवा अपने गले में , अपने पैरो में, अपने अंगूठे में, अपनी बाजुओं में काले, लाल धागे बांध कर घूम रहे हैं, ताकि सफलता मिल जाए , ताकि एग्जाम में पास हो जाए, ताकि आत्मविश्वास आ जाएं, लेकिन विद्यार्थियों ऐसा कभी हो नही सकता हैं क्योंकि ये तार्किक नही हैं, ये नेचर के नियम के खिलाफ हैं, ये प्रकृति के लॉ के विरुद्ध हैं। अंधविश्वास और आत्मविश्वास दोनो के अलग अलग पहलू होते है, ये दोनो ह्यूमन बीइंग की दो नेगेटिव तथा पॉजिटिव क्वालिटी हैं।  एक जो नेगेटिव क्वालिटी है वो अंधविश्वास को बढ़ावा देती हैं, उनकी गतिविधियां अलग होती है, जैसे अंधविश्वासी लोग आक्रमणता, दिमागी संकीर्णता, बहकावे में जल्दी आना,

तर्कशीलता की कमी, जीवन में भय का प्रभाव, पाखंडियों के प्रभाव में रहना, अवैज्ञानिक पर आधारित कर्मकांड को ही धर्म समझना, धर्म के नाम पर पाखंड फैलाने में सहयोग करना, जीवन के नेगेटिव पहलू को बढ़ावा देना। इसके विपरित जो लोग आत्मविश्वासी हैं, उनमें मेहनत, समय की पाबंदी, तर्कशीलता, वैज्ञानिक सोच, पाखंड के विरुद्ध दृष्टिकोण, धर्म तथा कर्मकांड में अंतर समझना, पाखंड का खंडन करने में आगे आना, मूर्ति पूजा की सगुण और निर्गुण स्थिति को समझना , निर्भयता, धर्म का असली अर्थ समझना, यहां जो इन सभी गुणों को आत्मसात करता हैं, वह अपनी आत्मा का उत्थान करते हुए खुद के भीतर आत्मविश्वास को जन्म देता है। वैसे भी किसी भी व्यक्ति को या युवा पीढ़ी में आत्मिक उत्थान की जरूरत होती ही है, जिन गतिविधियों से आत्मा का पतन होता होता हो,उनसे कभी भी आत्मविश्वास पैदा हो ही नहीं सकता है। और जिन गतिविधियों से आत्मा का उत्थान होता हो उनसे कभी भी अंधविश्वास पैदा नहीं होता हैं। आत्मा के उत्थान के लिए सत्य, ईमानदारी, सद्भावना, सहयोग, सात्विकता, प्रेम, स्नेह , करूणा ,

दया, न्याय तथा दान जैसे गुणों का सहारा लेना पड़ता हैं। जब व्यक्ति गलत कार्य करते है, झूठ बोलते हैं, अन्याय करते है, चोरी करते है, भ्रष्टाचार करते हैं, वासना में लिप्त रहते है, गलत का साथ देते है, सही तथा गलत की पहचान नहीं कर पाते हैं, लोगो के साथ दुर्व्यवहार करते है, बहन बेटियों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ करते है, दूसरे के धन वा संपदा को लूटने का कार्य करते है, दूसरों के अधिकारों का हनन करते है, क्रिटिक्स का सम्मान नहीं करते है, तो उनकी आत्मा का पतन होता जाता हैं, आत्मिक रूप से पतित व्यक्ति किसी का कल्याण नहीं कर सकता है। वेद का एक वाक्य हैं कि " आचारहीनम न पुनंती वेदा" अर्थात जिनका चरित्र गिर गया या जिनके आचार गिर गए उन्हें वेद का ज्ञान भी पवित्र नहीं कर सकता है, उनका कोई भी कल्याण नहीं कर सकता है। जो आचार से डिग गये, वो भयभीत रहते है और वो फिर अंधविश्वास का सहारा लेता हैं, तथा जो व्यक्ति और खासकर युवा पाखंड का सहारा लेता हैं वो अंधविश्वास में जरूर पड़ता हैं, क्योंकि वो आत्मिक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है, आत्मबल बहुत कम हो जाता हैं।

ऐसे युवाओं की बुद्धि काम नही करती है, उसके मन में सदैव संदेह की स्थिति बनी रहती है, मन ड्यूलिटी में रहता है, मन हमेशा द्वंद में बना रहता है , बुद्धि अस्थिर रहती है,और निरंतर भयग्रस्त रहते हैं। भारत के महान संत स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि निर्भीकता मानव की सबसे बड़ी शक्ति है। आत्मविश्वास युवाओं को प्रेरणा देता है , दृढ़ संकल्पित करता है और उत्साह भरता हैं, इसके विपरित अंधविश्वास युवाओं को अस्थिर, भयभीत, आलसी, कमजोर बनाता है ।

अगर युवाओं को अंधविश्वास से छुटकारा चाहिए तो उन्हे मेहनत करनी होगी, परिश्रम करना होगा, सत्य का पालन करना होगा और प्रेम को जीवन में उतारना होगा, जिससे कि उनकी आत्म जागृत हो जाए, आत्मिक रूप से उतिष्ठ हो जाए।युवाओं की बुद्धि स्थिर हो जाए, जिससे जीवन में आत्मबल का उदय हो और आत्मविश्वास पैदा हो जाए। युवा साथियों आत्मविश्वास ही श्रेष्ठ जीवन की कुंजी है, क्योंकि आत्मविश्वास मेहनत, ज्ञान, विनम्रता, स्नेह, करुणा, सत्य, सद्भावना से पोषित होता है।
जय हिंद, वन्दे मातरम