हरियाणा में अब सामूहिक छात्र संघर्ष समिति होगी गठित: दिग्विजय चौटाला
mahendra india news, new delhi
युवा जननायक जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष दिग्विजय चौटाला ने कहा कि प्रदेशभर में छात्रों की मांगों की सुनवाई करने के उद्देश्य से अब सामूहिक छात्र संघर्ष समिति गठित की जाएगी जिसमें एसएफआई, एनएसयूआई, एबीवीपी, इनसो सहित सभी छात्र संगठनों को एक मंच पर लाया जाएगा। इसके पीछे महज छात्रों की सुनवाई करवाना है और ऐसा करने पर विद्यार्थियों की मांगों को आसानी से पूरा करवाया जा सकेगा।
गुरुवार को जारी बयान में युवा जेजेपी के प्रदेशाध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने कहा कि आज छात्र वर्ग के समक्ष ात्र संघ चुनाव, फीस रेगुलेटरी बोर्ड, टीचिंग, नॉन टीचिंग पदों को भरने, परीक्षा परिणाम समय पर घोषित होने, भर्ती परीक्षाओं का शैड्यूल निश्चित करने सहित विभिन्न मुद्दे हैं और जब सभी छात्र संगठनों की उपरोक्त मांगें समान हैं तो ऐसे में एक मंच पर सभी छात्र संगठनों के होने पर छात्रों की सुनवाई आसान होगी और इससे हरियााा में बड़ा छात्र आंदोलन खड़ा किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि छात्र शक्ति की एकता को एक मंच पर लाने की प्रेरणा दिल्ली के जंतर-मंतर व झारखंड में जैन-जी द्वारा किए गए सफल छात्र आंदोलन से मिली है।
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि आज देश की दिशा व दशा को जैन-जी या कहे छात्र ही बदल सकते है। ऐसे में उनकी पार्टी की छात्र इकाई इनसो सामूहिक छात्र संघर्ष समिति के माध्यम से कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई, कम्यूनिस्ट पार्टियों की छात्र इकाई एसएफआई, भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी सहित विभिन्न पार्टियों के छात्र संगठनों को साथ लेकर एक मंच बनाएगा। जिसकी मुख्य मांगें उपरोक्त होंगी। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि वे खुद एमए राजनीति शास्त्र के कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र हैं।
वे स्वयं अपने विश्वविद्यालय के हर कक्षा, कैंटीन व प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में जाकर ऐसे लोगों का नेतृत्व तैयार करेंगे जो प्रदेश में छात्र हितों के लिए आगे बढ़े तथा अपनी मांगें पूरी होने तक इसे आंदोलन का रूप दे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सामूहिक छात्र संघर्ष समिति का नेतृत्व का फैसला सामूहिक संघर्ष समिति बनने के बाद उसके डेलीगेट मैंबर पर निर्भर करेगा तथा यह नेतृत्व जरूरी नहीं इनसो से जुड़ा कोई नेता हो, अन्य दलों की छात्र इकाई का भी हो सकता है। उन्होंने साफ किया कि प्रदेश में जितने भी छात्र संगठन हैं, उनकी मांगे लगभग समान हैं। ऐसे में इन संगठनों को एक मंच पर आकर अपनी लड़ाई लडऩी चाहिए।