सिरसा रामलीला में संजू महंत ने किया नशे रूपी रावण के वध का आह्वान, युवाओं को दिया संदेश

 

mahendra india news, new delhi
सिरसा मोहल्ला गौशाला में चाचाणों वाली धर्मशाला के पीछे स्थित रामलीला मैदान में आयोजित श्री लक्ष्मण कला केंद्र की रामलीला के सातवें दिन भगवान श्रीराम द्वारा माता शबरी के बेर खाने तथा सीता हरण के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। धार्मिक प्रसंगों के साथ-साथ रामलीला के मंच से समाज को नशामुक्त बनाने का संदेश भी दिया गया। श्री लक्ष्मण कला केंद्र में मंच संचालन कर रहे रविंद्र सैनी ने बताया कि रामलीला के सातवें दिन संजू महंत, हरियाणा प्रदेश गद्दीनशीन, आशु जी, महक महंत व अन्य श्रद्धालु रामलीला स्थल पर पहुंचे।

संजू महंत ने मंच से हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया। संजू महंत ने नशे को समाज के लिए गंभीर अभिशाप बताते हुए नशे रूपी रावण के वध का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने रावण का अंत करके बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया, उसी प्रकार हम सभी को एकजुट होकर नशे जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए आगे आना होगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से स्वयं नशे से दूर रहने तथा युवाओं को भी नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने की अपील की।
 

रामलीला देखने पहुंच रहे हजारों श्रद्धालु, कमेटी ने जताया आभार:
श्री लक्ष्मण कला केंद्र के प्रधान विनोद राकेशिया, उपप्रधान अश्वनी सैनी, फास्ट ट्रैक जिम संचालक धीरूभाई रोहिला, उपप्रधान टोनी सैनी, रोहतास जोगी व पूर्व नगर पार्षद रोहतास वर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि गौशाला मोहल्ले में चाचाणो वाली धर्मशाला के पीछे स्थित रामलीला मैदान में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु और भक्तजन भगवान श्रीराम की लीला देखने पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु धार्मिक प्रसंगों का आनंद लेने के साथ-साथ भगवान श्रीराम के आदर्शों और शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा भी प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के इस दौर में भी रामलीला जैसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह सराहनीय है। रामलीला कमेटी ने इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने में सहयोग कर रहे सभी श्रद्धालुओं और भक्तजनों का आभार व्यक्त किया। कमेटी के पदाधिकारियों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में रामलीला देखने पहुंचने की अपील करते हुए कहा कि ऐसी धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीराम की शिक्षाओं, आदर्शों और मयार्दाओं का प्रचार-प्रसार होता है तथा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिलता है।