पर्यावरण संरक्षण के लिए 3 आर रिड्यूस, रियूज व रीसायकल का मंत्र अपनाने का आह्वान
Call to adopt the 3R mantraReduce, Reuse, and Recycle for environmental conservation
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर आउटरीच प्रोग्राम एंड एक्सटेंशन (यूकोप) द्वारा विश्वविद्यालय के गैर-शैक्षणिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन वीरवार को टैगोर भवन के एक्सटेंशन हॉल में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने की।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने पर्यावरण संरक्षण के लिए '3 आर' (रिड्यूस, रियूज व रीसायकल) का मंत्र अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जितना हम लेते हैं, उतना ही उसे लौटाने का भी प्रयास करना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय नेक के आगामी मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए परिसर को स्वच्छ, हरित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य केवल उत्कृष्ट ग्रेड प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि एक ऐसा हरित एवं सतत (सस्टेनेबल) परिसर विकसित करना है,
जो अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बने। कुलगुरु ने कहा कि यदि प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल एवं विद्युत की बचत करने, कचरे का पृथक्करण करने तथा अधिक से अधिक पौधारोपण एवं उनके संरक्षण का संकल्प ले, तो विश्वविद्यालय परिसर को पर्यावरण संरक्षण का आदर्श मॉडल बनाया जा सकता है। उन्होंने सभी कर्मचारियों से दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल आदतों को अपनाने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय के पर्यावरण मामलों के मानद सलाहकार मित्रसेन गर्ग ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने आरओ एवं एयर कंडीशनर से निकलने वाले अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग करने पर बल देते हुए कहा कि इससे जल की काफी बचत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में जल संकट एक गंभीर चुनौती के रूप में सामने आ सकता है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जल के विवेकपूर्ण उपयोग की आदत विकसित करनी होगी।
उन्होंने गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग करने की अपील करते हुए कहा कि कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जा सकती है, जबकि सूखे कचरे का पुनर्चक्रण कर प्राकृतिक संसाधनों की बचत की जा सकती है। श्री गर्ग ने कहा कि छोटे-छोटे पर्यावरण अनुकूल प्रयास, जैसे कपड़े के थैले का उपयोग, एकल उपयोग प्लास्टिक से बचाव, वर्षा जल संचयन तथा ऊर्जा की बचत, बड़े सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने कर्मचारियों से अपने घरों और कार्यस्थलों पर पर्यावरण संरक्षण संबंधी आदतों को अपनाने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में यूकोप के निदेशक प्रो. सुल्तान सिंह ढांडा ने अतिथियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर रूरल स्टडीज के निदेशक डॉ. रविंद्र ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. टिम्सी मेहता ने किया। इस अवसर पर रामचंद्र मौर्य, सुरेंद्र नुहिया, किरण भल्ला, डॉ शेफाली सहित कर्मचारी उपस्थित थे।