सरकार की वादाखिलाफी व पैरेलल लाइसेंस के समर्थन की प्रतियां , संयुक्त संघर्ष मोर्चे द्वारा नाथूसरी सब डिवीजन में जलाई गई
mahendra india news, new delhi
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त सांझा संघर्ष समिति के आह्वान पर आज नाथूसरी बिजली बोर्ड के प्रांगण में बड़ी संख्या में बिजली कर्मचारी एकत्रित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता सब यूनिट (HSEB) के प्रधान राकेश जांगड़ा एवं AHPC के प्रधान खुशी राम द्वारा संयुक्त रूप से की, जबकि मंच संचालन सब यूनिट सचिव सुनील जाखड़ व विजेंद्र ने किया। विरोध प्रदर्शन में प्रमुख रूप से HSEB वर्कर्स यूनियन के अर्द्धशहरी मंडल सचिव श्री सतबीर सिंह व AHPC के कैशियर शीशपाल ने शिरकत की, अर्द्धशहरी सचिव सतबीर ने
संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने नूँह मेवात की बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में देने के लिए HERC द्वारा अपनी जो एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी उसने अपनी रिपोर्ट में उन इन क्षेत्रों को निजी हाथों में सौंपने पर अपनी सहमति व्यक्त की।
पिछले दिनों सयुक्त संघर्ष मोर्चा की प्रस्तावित हड़ताल को बिजली मंत्री ने यह आश्वासन दिया कि सरकार किसी भी क्षेत्र को निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा,जबकि अब अपनी चाहती कमेटी बना कर उनसे अपनी चाहती रिपोर्ट तैयार करवाई गई ।जिसको लेकर बिजली कर्मचारियों भारी रोष है।अगर सरकार अभी नहीं मानी ओर निजीकरण की कोशिश की तो सरकार को आने वाले समय में इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा।
अर्द्धशहरी मंडल (AHPC)के
कैशियर शीशपाल ने कहा कि ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी तथा एग्री डिस्कॉम जैसी कर्मचारी विरोधी नीतियों को भी जो मीटिंग में फैसले हुआ उसको वापस नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी दिन-रात कठिन एवं जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं, इसलिए उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
राकेश जांगड़ा एवं विजेंद्र ने कहा कि HKRN कर्मचारियों की जॉब सिक्योरिटी सुनिश्चित की जाए तथा समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।
संघर्ष समिति के नेताओं खुशी राम व राकेश जांगड़ा ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को रद्द करना, एग्री डिस्कॉम बनाने की योजना वापस लेना, बिजली कर्मचारियों के लिए रिस्क अलाउंस लागू करना, HKRN कर्मचारियों की जॉब सिक्योरिटी सुनिश्चित करना तथा रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार एवं निगम प्रबंधन की होगी।
इस अवसर पर विभिन्न दूसरे संगठनों के पदाधिकारी ने व बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे और अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता का परिचय दिया।