दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिरसा में भव्य भजन संध्या का आयोजन, भक्ति रस में डूबा समूचा वातावरण

 

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सिरसा। दिल्ली पब्लिक स्कूल, सिरसा में भव्य एवं आध्यात्मिक भजन संध्या का आयोजन किया गया, जिसने पूरे विद्यालय परिसर को भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंग दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया, जिससे वातावरण में पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। इस गरिमामयी अवसर पर विद्यालय प्रबंधन समिति से नवनीत जैन एवं आरती जैन, ब्रह्मकुमारी आश्रम सिरसा से बिंदु, वनिता, सुमन एवं लविश, साथ ही मीनू सोनी और सुषमा राठी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का विद्यालय परिवार द्वारा हार्दिक स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय प्रांगण भजनों की मधुर ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। भक्ति के इस अद्भुत आयोजन में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया और आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया।

इस भजन संध्या में विद्यालय के छात्रों एवं अध्यापकों ने भी अपने गायन कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और भी बढ़ गई। प्रख्यात भजन गायक देव जीत मितवा, अजय डोडा एवं ऋषव गाबा ने अपने मधुर एवं भावपूर्ण स्वरों से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके भजनों ने न केवल मन को स्पर्श किया, बल्कि सभी को भक्ति में झूमने पर भी विवश कर दिया। सोनिका और रवीना की भावपूर्ण प्रस्तुति ने ऐसा आभास कराया मानो स्वयं श्री श्याम बाबा उस पावन स्थल पर विराजमान हों। वहीं, जानू सोनी द्वारा प्रस्तुत कृष्ण लीला पर आधारित भजन एवं नृत्य ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया और कार्यक्रम में विशेष आकर्षण का केंद्र बना। कार्यक्रम के समापन पर हरविंदर ने गुरमत संगीत के अंतर्गत गुरबाणी शब्द का गायन प्रस्तुत किया,

जिसमें तार शहनाई और पखावज की संगत ने पारंपरिक संगीत की गरिमा को और भी बढ़ा दिया। यह प्रस्तुति अत्यंत मनोहारी एवं आत्मिक अनुभूति प्रदान करने वाली रही। इस अवसर पर विद्यालय की प्राचार्या डॉ. रमा दहिया ने अपने संबोधन में सभी अतिथियों, अभिभावकों, श्रोताओं एवं विद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और संस्कारों का संचार करते हैं, जो एक सशक्त समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने आगे कहा कि भजन और संगीत के माध्यम से विद्यार्थियों का भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास होता है,

जिससे उनमें अनुशासन, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का निर्माण होता है। ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने यह भी प्रेरित किया कि विद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन निरंतर करता रहेगा, ताकि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके।