राजस्थान में मेयर-सभापति के नामांकन में बीजेपी -कांग्रेस के बीच निर्दलीयों ने बदला गणित?2028 के विधानसभा चुनाव के लिए क्या संकेत

 

mahendra india news, new delhi

राजस्थान के 305 नगरीय निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के चुनाव होने हैं। इनकी तस्वीर बुधवार को नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के साथ काफी साफ हो गई। बता दें कि अब नामांकन का समय खत्म हुआ। अब 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच और 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद अंतिम मुकाबला तय होगा।

मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए मतदान 21 सितंबर को होगा, जबकि उप महापौर और उपाध्यक्ष पद के चुनाव 22 सितंबर को होंगे। निकाय चुनाव के बाद सामने आए वार्डों के गणित ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। कई नगर निगम और नगर परिषदों में दोनों दल बहुमत से दूर हैं। ऐसे में आजाद पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। कुछ निकायों में पार्टी के भीतर की नाराजगी और बागियों ने भी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

2028 के विधानसभा चुनाव के लिए क्या संकेत?

राजस्थान विधानसभा चुनाव में अभी 2  साल से अधिक का समय है। इसलिए दोनों प्रमुख दल इन नतीजों का अपने-अपने तरीके से विश्लेषण करेंगे। BJP के लिए सरकार के खिलाफ स्थानीय स्तर पर उभरती नाराजगी को पहचानना और संगठन को मजबूत करना चुनौती होगी। वहीं कांग्रेस के सामने निकाय चुनाव में मिली बढ़त को व्यापक राज्यव्यापी राजनीतिक समर्थन में बदलने की चुनौती होगी।

इन नतीजों ने यह भी संकेत दिया है कि राजस्थान में कई क्षेत्रों में मुकाबला केवल BJP और कांग्रेस तक सीमित नहीं रह गया है। निर्दलीय उम्मीदवारों की मजबूत मौजूदगी आने वाले चुनावों में दोनों दलों के लिए चुनौती बन सकती है। 21 सितंबर को मेयर और सभापति के चुनाव के बाद यह तस्वीर और स्पष्ट होगी कि किस पार्टी ने निर्दलीयों को अपने साथ जोड़कर निकायों में सत्ता का समीकरण अपने पक्ष में किया।