सिरसा के शाह सतनाम जी बॉयज स्कूल में दीप सजावट प्रतियोगिता आयोजित, बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता
mahendra india news, new delhi
शाह सतनाम जी बॉयज स्कूल सिरसा में विद्यार्थियों की रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से इंटर-क्लास दीप सजावट प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में कक्षा केजी से आठवीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने विभिन्न रंगों, डिजाइनों और आकर्षक सजावट के माध्यम से दीप सजाकर अपनी कला एवं कल्पनाशीलता का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रशासक डॉ. हरदीप सिंह इन्सां, प्रधानाचार्य राकेश धवन इन्सां और को-आॅर्डिनेटर गुरप्रीत सिंह मौजूद रहे। उन्होंने विद्यार्थियों की कला-कौशल की सराहना की। इस दौरान विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि भारतीय त्योहार देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं के प्रतीक हैं। दीप सजावट जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ पारंपरिक कला एवं हस्तकला के प्रति रुचि विकसित करने में सहायक होती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को त्योहारों को केवल उत्सव के रूप में मनाने के बजाय उनके पीछे छिपे सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को समझने तथा उन्हें जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
नर्सरी से 8वीं तक के विद्यार्थियों ने बनाए दीये, रंगोली, तोरण, पेंटिंग और सजावटी सामान
शाह सतनाम जी गर्ल्स स्कूल सिरसा में दीपावली के उपलक्ष्य में भव्य दीवाली मेले का आयोजन किया गया। मेले का शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्या डॉ. शीला पूनिया व उप प्रधानाचार्या सीमा छाबड़ा इन्सां ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान विद्यालय परिसर में बच्चों की प्रतिभा और हुनर की शानदार झलक देखने को मिली। प्राचार्या डॉ. शीला पूनिया ने विद्यार्थियों को दीपावली के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि दीपक हमें संदेश देता है कि जिस तरह वह स्वयं जलकर दूसरों के जीवन में उजाला करता है, उसी तरह हमें भी दूसरों के जीवन में खुशियां और सकारात्मकता लाने का प्रयास करना चाहिए। मेले में नर्सरी से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों ने अपनी मेहनत और कल्पनाशक्ति से तैयार विभिन्न सजावटी वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई। बच्चों द्वारा बनाई गई कलाकृतियां अभिभावकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।
किस कक्षा ने क्या बनाया
कक्षा पहली के विद्यार्थियों ने सुंदर दीये, सजी हुई थालियां और रंग-बिरंगी मोमबत्तियां तैयार कीं। कक्षा दूसरी के बच्चों का रोशनी वाला दीया आकर्षण का केंद्र रहा। कक्षा तीसरी के विद्यार्थियों ने फूलदान, सुंदर दृश्य और दीया रंगोली के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाई। कक्षा चौथी में फोटो फ्रेम, वॉल हैंगिंग और लाइटिंग से जुड़ी सजावटी वस्तुएं तैयार की गईं। कक्षा पांचवीं के विद्यार्थियों ने तोरण और रंगोली बनाई। कक्षा छठी के बच्चों ने पाइप क्लीनर से विभिन्न कलाकृतियां तैयार कीं। इसके अलावा दिया थाली और व्यक्तिगत व सामूहिक रूप से मोमबत्तियां भी बनाईं। कक्षा सातवीं के विद्यार्थियों ने दिया मैट, तोरण, पेंटिंग और अखबार से आकर्षक टोकरियां तैयार कीं। वहीं, कक्षा आठवीं के विद्यार्थियों ने टेबल डेकोरेशन सामग्री, स्टैंडिंग दीया, जूट की बोतल पर सजावट, पेंटिंग और वॉल हैंगिंग बनाकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। मेले में बच्चों की कलाकृतियां देखने के लिए बड़ी संख्या में अभिभावक पहुंचे। नन्हे हाथों से तैयार की गई सुंदर वस्तुओं को देखकर वे काफी प्रभावित हुए और उन्होंने बच्चों के प्रयासों की जमकर सराहना की। मेले में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
अंत में प्राचार्या डॉ. शीला पूनिया ने सभी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों में रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास विकसित करने के साथ उनकी प्रतिभा को निखारने में सहायक होती हैं।
फोटो: सिरसा03,04- दीपावली मेले का अवलोकन करते प्रधानाचार्या व अन्य।
प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका अध्यापक गगन इन्सां और विकास वधवा ने निभाई। प्रधानाचार्य राकेश धवन इन्सां ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़े रहने और अपनी प्रतिभा को निरंतर निखारने के लिए प्रेरित किया।