रिफॉर्म उत्सव-2026 के तहत किसानों को कॉटन की खेती के प्रति किया जागरूक
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भारतीय कपास निगम लिमिटेड व वस्त्र मंत्रालय ने करवाया जागरूकता कार्यक्रम
सिरसा। भारत कपास निगम लिमिटेड व वस्त्र मंत्रालय की ओर से किसान भवन में विश्व कपास दिवस के मौके पर रिफॉर्म उत्सव-2026 कार्यक्रम आयोजित किया गया। हरियाणा कॉटन जीनर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुशील मित्तल ने बताया कि कार्यक्रम में डीजीएम कपास निगम अभिजीत शर्मा, केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र सिरसा के पूर्व अध्यक्ष डा. दलीप मोंगा, सहायक प्रबंधक कपास निगम आर के गोयल, कॉटन जीनर्स एसोसिएशन के जिला प्रधान पवन गांधी, मार्केट कमेटी के सचिव विरेंद्र मेहता व दीपक लाठर उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम सभी ने मिलकर दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र सिरसा के पूर्व अध्यक्ष डा. दलीप मोंगा ने कपास के घटते रकबे व उत्पादन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर भारत में हरियाणा, पंजाब व राजस्थान तीनों राज्यों में 17-18 लाख रकबे में कॉटन का उत्पादन होता था, जोकि साल-दर-साल घटकर मात्र 7 से 8 लाख रह गया है। उन्होंने बताया कि अकेले सिरसा जिले में 7 से 8 लाख रकबे में कॉटन की खेती होती थी। डा. मोंगा ने कहा कि पिछले कुछ सालों के मुकाबले इस बार कॉटन की खेती अच्छी है और रिकॉर्ड उत्पादन होने के आसार हैं। सरकार भी कॉटन की खेती के रकबे व उत्पादन को बढ़ाने के लिए लगातार किसान हित में योजनाएं लागू कर रही है।
उन्होंने किसानों से कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार खेती करने, पानी का उचित उपयोग करने और फसल में संतुलित पोषक तत्वों का प्रयोग करने का आह्वान किया गया। इस मौके पर हरियाणा कॉटन जीनर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सुशील मित्तल ने बताया कि कपास न केवल किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, ग्रामीण रोजगार और वस्त्र उद्योग की मजबूती में भी इसकी अहम भूमिका है। उन्होंने कपास उत्पादन को बढ़ावा देने, किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा कपास की गुणवत्ता में सुधार पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि किसान, कृषि वैज्ञानिक, व्यापारी और उद्योग जगत मिलकर काम करें तो कपास क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। मंच संचालन कर रहे राजीव शर्मा ने बताया कि विश्व कपास दिवस का उद्देश्य कपास के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा कपास उत्पादन से जुड़े किसानों और श्रमिकों के योगदान को सम्मान देना है। बदलते मौसम, कीट प्रकोप और उत्पादन लागत जैसी चुनौतियों के बीच किसानों को वैज्ञानिक खेती की जानकारी उपलब्ध करवाना बेहद जरूरी है। किसानों को उन्नत बीज, संतुलित खाद एवं आधुनिक सिंचाई तकनीकों के साथ-साथ फसल प्रबंधन की नवीन विधियों को अपनाना चाहिए। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, इसके लिए सरकार, कृषि विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं को मिलकर प्रयास करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि कपास की खेती को आधुनिक तकनीक और मूल्य संवर्धन से जोड़कर किसानों की आय में और वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं व कॉटन की खेती के बारे में प्रोजेक्टर के माध्यम से विस्तार से बताया। इस मौके पर भारी संख्या में किसानों ने उपस्थिति दर्ज करवाई। किसानों ने कपास विशेषज्ञों से कॉटन की खेती से संबंधित सवाल भी पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया।