लड़कियों को देवी बनाने की नहीं, बल्कि बराबरी का हक चाहिए: मनीषा हंस
mahendra india news, new delhi
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा ब्लॉक सिरसा, सीटू, लोक चेतना कला एवं साहित्य मंच सिरसा की तरफ से सिरसा स्थित पटवार भवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वीरो रानी, राज रानी, शिमला रानी, रेखा रानी ने संयुक्त रूप से की । एडवोकेट डा. बलबीर कौर गांधी ने मंच संचालन किया। मास्टर कुलदीप पनिहारी ने अपने सुरीले गीत के माध्यम से कार्यक्रम की शुरूआत की और बेटियों के समर्पित गीत गाए। एडवोकेट चंचल रानी द्वारा सभी आगंतुकों का स्वागत किया गया।
मुख्य वक्ता के तौर पर हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति राज्य इकाई सदस्य एवं प्रतिनिधि के तौर पर रोहतक से पधारी मनीषा हंस ने अमेरिका, इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले में मारी गई स्कूली छात्राओं से सम्बन्धित कविता से शुरूआत की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संसद व विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि गर्भधारण करना व बच्चा पैदा करना एक प्राकृतिक वरदान है, लेकिन इसके लिए उसकी जरूरतें भी अलग हैं।
बहुत सारी महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं। आज बहुत सारे बच्चे कम वजन के पैदा हो रहे हैं। आंगनबाड़ी में महिलाओं को पूरा पोषण नहीं दिया जा रहा। इस समाज में महिला, बच्चियां भी सुरक्षित नहीं हैं, जब भी कोई साम्राज्यवादी देश किसी अन्य देश पर हमला करता है तो सिर्फ जमीन पर ही कब्जा नहीं करता, बल्कि वहां के बच्चों व महिलाओं पर सबसे ज्यादा अत्याचार होते हैं। कथित साधु सन्यासी जो महिलाओं का शोषण करते हैं उनको पैरोल दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ व बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली हरियाणा सरकार द्वारा लड़कियों के सैकड़ों स्कूल बन्द किए गए। हमारे समाज में लड़कियों पर अत्याचार करने वालों को सजा से बचाने के प्रयास किये जाते हैं कथित पंचायती भी बोलते हैं कि चलो कोई बात नहीं मिट्टी डालो। लड़कियों पर अत्याचार व छेड़छाड़ को उनके पहरावे से जोड़ने की कोशिश होती की जाती है जबकि खराबी तो सोच की है पुरुष प्रधान समाज की है।
महिला मुक्ति का प्रश्न भी समाजिक व्यवस्था को बदलने के साथ जुड़ा हुआ है। इस देश में आईपीएस महिला को भी यौन शोषण का शिकार होना पड़ा, स्वर्ण पदक विजेता खिलाडियों को शोषण का शिकार होना पड़ा। दूसरी तरफ लड़कियों को देवी बनाकर पूजा करने का ढोंग किया जाता है। लड़कियों को देवी बनाने की नहीं, बल्कि बराबरी का हक चाहिए, सम्मान चाहिए। यही महिला आंदोलन का लक्ष्य है। यही अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का असली उद्देश्य है। मास्टर कुलदीप सिंह सिरसा द्वारा क्रांतिकारी गीत पेश किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली एवं देश के साथ सिरसा जिले का भी नाम रोशन करने के लिए दो महिला खिलाड़ियों मुस्कान व पूजा को मंच पर सर्वकर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान मदन लाल खोथ व अध्यक्ष मंडल के द्वारा सम्मानित किया गया। किरण रानी द्वारा प्रस्ताव पेश किया गया व अध्यापक संघ की नेत्री सुनीता मकानी ने प्रस्ताव का अनुमोदन करते हुए प्रस्ताव पास किया।
इसी दौरान हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति सिरसा द्वारा राज्य निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अध्यापक बूटा सिंह व रेखा गोयल को सम्मानित किया गया। इस गोष्ठी में हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति की पूरी टीम जिला सचिव ललित सोलंकी, कोषाध्यक्ष सुशील पुरी, मास्टर वीर सिंह, हमजिंदर, डा. एच आर गांधी व अन्य सदस्य शामिल हुए। इसके अतिरिक्त नीलम, मनोरमा, रुक्मणि, कमला, डा. हरभगवान चावला, परमानन्द शास्त्री, सी डी एल यू की सहायक रजिस्ट्रार किरण भल्ला, देवेंद्र कुमार, मास्टर मंगा राम, राज कुमार शेखुपुरिया, महेंद्र शर्मा, मदन लाल खोथ, रमेश सैनी, दीपक सांवरिया, अविनाश कम्बोज, कृपाशंकर त्रिपाठी, रवि रोड़ी, एडवोकेट सिंपल रानी ने इस कार्यक्रम में शिरकत की।