हरियाणा में एसई सुसाइड मामला:  तीन पेज के सुसाइड नोट में आईएएस, एसई सहित 12 अधिकारियों के नाम

 

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हरियाणा प्रदेश के करनाल में एसई ने सुसाईड कर लिया। पांच माह पहले जाट और झोटे पर दिए विवादित बयान के बाद निलंबित चल रहे एसई (अधीक्षण अभियंता) 58 साल के गीतू राम ने सेवानिवृत्ति के दिन जहर निगल आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार एसई डीएवी स्कूल के पास कार में मृत मिले। पुलिस ने 3 पेज का सुसाइड नोट बरामद किया है।

इसमें विभाग के एक आईएएस, एसई और एक्सईएन (कार्यकारी अभियंता) और एसडीओ (उपमंडल अधिकारी) सहित 12 अफसरों के नाम लिखे हैं। छेड़छाड़ कर उनकी वीडियो प्रसारित की गई। बता देें कि वीडियो प्रसारित होने के दौरान वह सोनीपत में एसई थे। निलंबन के बाद मुख्यालय से अटैच थे। वह अनुसूचित जाति से थे और यहां सेक्टर 9 में पत्नी, 2 बेटियों और बेटे के साथ रह रहे थे।


जानकारी देते हुए गीतू राम की बेटी बृंदा और नीति ने बताया कि सोमवार सुबह 7 बजे पिता यह कहकर निकले थे कि वे आज बिजली विभाग को अंतिम शिकायत पत्र भेजने जा रहे हैं। इसके बाद काफी समय बाद जब नहीं लौटे तो उनकी तलाश शुरू की।

वह डीएवी स्कूल के पास अपनी कार की पिछली सीट पर मृत मिले। उनको प्राईवेट अस्पताल में ले जाया गया, वहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। । पुलिस ने देर रात आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया। पोस्टमार्टम के बाद स्वजन ने शव लेने से इन्कार कर दिया और आरोपितों की गिरफ्तारी पर अड़ गए।


विवादित वीडियो क्लिप हुई थी वायरल
आपको बता दें कि एसई गीतू राम का 5 माह पहले जाट-झोटा टिप्पणी वाला वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इसमें वह कहते सुनाई दिए थे कि 'जाट और झोटा जहां मिलै, उड़ै ऐ ल_ मारो।' इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालांकि उन्होंने अगले दिन ही सोशल मीडिया पर समाज के लोगों से माफी भी मांग ली थी। हम उस वीडियो की पुष्टि नहीं करते हैं।

 इन अधिकारियों के नाम
एसई द्वारा सुसाइड नोट में बिजली निगम के एमडी एवं आईएएस विक्रम सिंह, एसई मनिंदर सिंह, धर्म सिंह सुहाग, अजय खोखर, एक्सईएन रणबीर देशवाल, अश्विनी कौशिक, राज सिंह, एसडीओ सतीश गोयत, एसडीओ प्रदीप, आशीष, रूपेश और अंडर सेक्रेटरी मोहित भटनागर के नाम लिखे हैं।


जातिगत रंजिश, संपत्ति की हो जांच
सुसाइड नोट में एसई ने ये भी लिखा है कि 30-40 बार उन्होंने अधिकारियों को शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारी जातिगत रंजिश रखते थे और अदालत मामला के बाद अपना अधिकारी नहीं मानते हैं। खुले तौर पर जातिसूचक टिप्पणी करते थे। मेरे निर्देशों की अवहेलना करते रहे। सुसाइड में छह इंजीनियरों की संपत्ति की जांच की मांग भी की है।