हिंदी दिवस :हिंदी संस्कृति, संवाद, ज्ञान और एकता की भाषा: डॉ. जय प्रकाश
mahendra india news, new delhi
हिंदी दिवस के पावन अवसर पर JCD विद्यापीठ के महानिदेशक डॉक्टर जय प्रकाश ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा समाज के प्रत्येक सदस्य को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि यह दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी मातृभाषा के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का विशेष अवसर है। भाषा ही वह माध्यम है जो हमें जोड़ती है, हमारे विचारों को स्वर देती है और हमारी सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाती है।
डॉ. जय प्रकाश ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा होने के साथ-साथ विचार, भावना, ज्ञान और संस्कारों की अभिव्यक्ति का सबसे सहज एवं प्रभावशाली साधन है। यह भाषा हमारी विरासत का हिस्सा है, जिसने साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता, प्रशासन, विज्ञान और समाज में उल्लेखनीय योगदान दिया है। आज के वैश्विक युग में भी हिंदी संवाद, शिक्षा और संस्कृति का सशक्त माध्यम बनी हुई है। अनेक क्षेत्रों में हिंदी का उपयोग बढ़ रहा है, जिससे यह भाषा न केवल भारत की पहचान है बल्कि विश्व मंच पर भी प्रतिष्ठित हो रही है।
उन्होंनें कहा कि हिंदी का महत्व केवल संप्रेषण तक सीमित नहीं है। यह भाषा हमारी परंपराओं, लोककथाओं, त्योहारों और जीवन मूल्यों को संरक्षित करती है। हिंदी में अभिव्यक्ति करने से व्यक्ति अपने विचारों को सहज रूप से साझा कर सकता है। हिंदी हमारे राष्ट्र की आत्मा है, जो विविध भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने का पुल है। यह सामाजिक समरसता का आधार है और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि जेसीडी विद्यापीठ का उद्देश्य शिक्षा के साथ-साथ भाषा के प्रति जागरूकता और प्रेम विकसित करना है। हम चाहते हैं कि हमारे विद्यार्थी हिंदी को अपनाएँ, इसे संवाद का हिस्सा बनाएं, साहित्य से जुड़ें और अपनी संस्कृति से परिचित हों। शिक्षकों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को हिंदी भाषा की गहराई, उसकी सुंदरता और उपयोगिता से अवगत कराएँ। साथ ही, अभिभावकों और समाज को भी भाषा के संरक्षण में सक्रिय योगदान देना चाहिए।
हिंदी दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रगति के लिए मिलकर प्रयास करें। भाषा तभी जीवित रहती है जब उसे अपनाया जाए, सीखने और साझा करने का माध्यम बनाया जाए तथा अगली पीढ़ियों तक पहुँचाया जाए। जेसीडी विद्यापीठ समय समय पर कार्यशालाएँ, संगोष्ठियाँ, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ, निबंध लेखन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर हिंदी के प्रचार-प्रसार में योगदान देता रहेगा।
हमारा विश्वास है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारे विचार, हमारे सपनों और हमारी आत्मा की अभिव्यक्ति है। आइए हम सब मिलकर हिंदी का सम्मान करें, इसे और समृद्ध करें तथा इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए गौरव का प्रतीक बनाएं।