आज नहीं जागे तो कब जागोगे” निजी बिजली लाइसेंस के खिलाफ HBKESSS का संघर्ष का ऐलान
mahendra india news, new delhi
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने विद्युत नियामक आयोग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को तुरंत रद्द करने की मांग की है। मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घनघस, एसडीओ विकास ठकराल, एसडीओ वीरेंद्र मलिक व एसडीओ राजेश मदेरणा ने जारी किये प्रेस वक्तव्य में बताया कि यह रिपोर्ट ऐसे सेवानिवृत्त लोगों द्वारा तैयार की गई है जिनकी कोई जवाबदेही नहीं है। यह रिपोर्ट बंद कमरे में बैठकर, सभी नियमों, रेगुलेशंस और जमीनी तथ्यों को नजरअंदाज करके बनाई गई है। यह सरकारी बिजली व्यवस्था को कमजोर कर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की एक सोची-समझी साजिश है।
उन्होंने कहा कि पूरे भारत में समानांतर लाइसेंस व्यवस्था का कोई उदाहरण नहीं है। जिस मेदांता ग्रुप का गुरुग्राम में 5-स्टार अस्पताल है, उसी ग्रुप की सहायक कंपनी 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' की नजर सिर्फ मुनाफे पर है। कंपनी की तैयारी केवल इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स, शॉपिंग मॉल और गुरुग्राम की बड़ी रेजिडेंशियल सोसाइटियों / फ्लैट्स और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स को बिजली देने की है।
इससे सरकारी कंपनी डीएचबीवीएन का रेवेन्यू बुरी तरह गिर जाएगा, जिससे निगम कम दरों पर बिजली देने में सक्षम नहीं रहेगा। इसके बाद यही निजी कंपनी मनमाने रेट पर बिजली बेचेगी, जिसका सीधा और सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के किसानों, ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं को होगा।
मोर्चा के पदाधिकारी देवेंद्र हुड्डा ने बताया कि यदि नियामक आयोग द्वारा निजी कंपनी को वितरण लाइसेंस दिया गया तो हरियाणा का समस्त बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होगा ।
मोर्चा ने मुख्य आपत्तियों पर चर्चा करते हुए कहा कि वितरण लाइसेंस नियमों के अनुसार लाइसेंस के लिए न्यूनतम तीन राजस्व जिले अनिवार्य हैं, लेकिन यहां नियमों को ताक पर रखकर कंपनी को केवल दो जिले - गुरुग्राम और नूंह - देने की तैयारी है। मात्र 1 करोड़ रुपये की पेड अप वाली कंपनी, जो पावर सेक्टर में अप्रैल 2026 में आई और जून 2026 में ही 750 करोड़ रुपये मासिक रेवेन्यू वाले क्षेत्र का लाइसेंस मांग रही है। कंपनी ने एक ही शेयर पर दो अलग-अलग संस्थाओं से Solvency Certificate लगाए हैं। कंपनी के पास CEI (Chief Electrical Inspectorate) License तक नहीं है। Universal Service Obligation (USO) के लिए पूरे क्षेत्र (गुरुग्राम और नूंह ) में लगभग 18,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जबकि कंपनी अपनी 5 साल की योजना में 1500 करोड़ रुपये से भी कम निवेश दिखा रही है।
मोर्चा का कहना है कि यदि लाइसेंस देने का यही तरीका रहा तो कल हर ठेकेदार / कॉन्ट्रैक्टर जिले-वार लाइसेंस मांगने लगेगा। इससे बिजली क्षेत्र टुकड़ों में बंट जाएगा और किसान, ग्रामीण और आम उपभोक्ता को मनमाने तरीके से महंगी बिजली मिलेगी, क्योंकि सरकार से सस्ती बिजली कोई भी निजी कंपनी नहीं दे सकती।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी योजना चेरी पिकिंग (फायदेमंद उपभोक्ताओं का चयन) पर आधारित है, जिसमें केवल 2.5% से 15% हाई-वैल्यू उपभोक्ताओं को टारगेट किया जाएगा, बाकी उपभोक्ताओं को DHBVN के पास ही छोड़ दिया जाएगा । स्मार्ट मीटर के नाम पर प्रीपेड लूट होगी, कृषि सब्सिडी और आम उपभोक्ता सब्सिडी खत्म होगी, रेगुलर नौकरियां खत्म होंगी। शुरू में टैरिफ सस्ता दिखाया जाएगा, लेकिन बाद में बीएसएनएल वाली कहानी दोहराई जाएगी।
इसलिए मोर्चा "आज नहीं जागे तो कब जागोगे" अपील लेकर जनता के बीच जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मोर्चा हरियाणा के सभी किसान नेताओं, किसान संगठनों, खाप पंचायतों, ग्रामीण उपभोक्ताओं, सरपंचों, आम बिजली उपभोक्ताओं और जनप्रतिनिधियों से हाथ जोड़कर अपील करता है कि यह लड़ाई सिर्फ बिजली कर्मचारियों की नहीं, बल्कि आपके हक की लड़ाई है।
आज आपके खेत की सस्ती बिजली, आपके घर की सब्सिडी वाली बिजली दांव पर लगी है। यदि आज हम सब मिलकर सरकार की इस दादागिरी और बिजली क्षेत्र के निजीकरण को नहीं रोकेंगे, तो कल बहुत देर हो जाएगी।