सीएचसी चौपटा में इमरजेंसी सुविधा का अभाव बना जानलेवा, सिस्टम पर उठे सवाल
mahendra india news, new delhi
नाथूसरी चौपटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में इमरजेंसी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव अब लोगों की जान पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सीधे सिरसा या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इलाज शुरू होने में होने वाली देरी कई बार घायलों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। रविवार को कुछ ही घंटों के अंतराल में हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों ने एक बार फिर चौपटा सीएचसी की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रविवार शाम करीब तीन बजे हुए पहले सड़क हादसे में एक दंपती घायल हो गया। घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, लेकिन वहां आवश्यक इमरजेंसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण चिकित्सकों ने उन्हें प्राथमिक उपचार देकर सिरसा रेफर कर दिया। इस घटना के कुछ घंटे बाद रात करीब नौ बजे भट्टू रोड पर एक ट्राले और मोटरसाइकिल की टक्कर में गांव मिंगनी खेड़ा निवासी 48 वर्षीय ताराचंद और उनकी 45 वर्षीय पत्नी मूर्ति देवी गंभीर रूप से घायल हो गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद काफी देर तक मौके पर एंबुलेंस नहीं पहुंची। ऐसे में राहगीरों ने मानवता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को ई-रिक्शा के माध्यम से चौपटा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी पर पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी और गंभीर हालत को देखते हुए दोनों को तुरंत रेफर कर दिया गया।
मूर्ति देवी की उपचार के दौरान रविवार रात को ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल ताराचंद को पहले सिरसा और बाद में हिसार के एक निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां सोमवार सुबह उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे ने क्षेत्र के लोगों में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौपटा सीएचसी में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और एंबुलेंस की लंबे समय से कमी बनी हुई है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में स्थायी उपचार मिलने के बजाय सीधे रेफर कर दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि अस्पताल में ट्रॉमा या इमरजेंसी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती और समय पर उपचार शुरू हो जाता, तो कई मामलों में मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।
लोगों ने यह भी बताया कि रविवार रात हुए हादसे में चौपटा अस्पताल से केवल एक ही एंबुलेंस उपलब्ध थी, जिसमें मृत महिला के शव और गंभीर रूप से घायल पति दोनों को सिरसा भेजा गया। इस स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और संसाधनों की कमी को उजागर कर दिया।
इस संबंध में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ. मीनल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों की कमी के कारण पूर्ण इमरजेंसी सेवाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीएचसी में कुल सात चिकित्सकों के स्वीकृत पद हैं, जबकि वर्तमान में केवल तीन चिकित्सक ही कार्यरत हैं। डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की मांग उच्च अधिकारियों को भेजी जा चुकी है तथा अगले एक-दो माह में अतिरिक्त स्टाफ मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि रविवार की घटना की विभागीय स्तर पर समीक्षा की जाएगी।
उनके अनुसार गंभीर अवस्था में पहुंचे मरीजों को उपलब्ध प्रोटोकॉल के तहत प्राथमिक उपचार देकर उच्च केंद्र रेफर किया गया था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नाथूसरी चौपटा जैसे बड़े ग्रामीण क्षेत्र को अब भी केवल रेफरल केंद्र के भरोसे छोड़ देना उचित है। हजारों ग्रामीणों की स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र होने के बावजूद यदि गंभीर मरीजों को समय पर इमरजेंसी उपचार नहीं मिल पाता, तो दुर्घटना के बाद का 'गोल्डन आॅवर' व्यर्थ हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि दुर्घटना के बाद शुरूआती एक घंटे के भीतर उचित उपचार मिलने पर कई गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। ऐसे में क्षेत्र के लोग लंबे समय से चौपटा सीएचसी में 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं, पर्याप्त चिकित्सकों की नियुक्ति, अतिरिक्त एंबुलेंस और ट्रॉमा सुविधा शुरू करने की मांग कर रहे हैं।