श्रीमदभागवत कथा श्रवण से दूर होते हैं मन के विकार और समाज बनता है स्वस्थ: पंडित सुगन
सिरसा। श्री बंशीवट कथा समिति के द्वारा प्रभात पैलेस में आयोजित कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित सुगन शर्मा ने आत्तमदेव ब्राह्मण कि कथा सुनाई। कथा व्यास ने बताया कि गोकरण जी के जन्म व अपने भाई धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्त करवाने हेतु श्री मद भगवान कथा सुनाने कि कथा सुनाई। श्रीमद् भागवत कथा में भगवान के अवतारों की कथा बार-बार सुननी चाहिए। इससे हृदय का विकार दूर हो जाता है। अपने अवतार के माध्यम से श्री हरी ने मानव जीवन को समझाने का प्रयास किया है।
घर में श्रीमद्भगवत की पूजा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस घर में सुमति अर्थात पूरा परिवार मिलकर रहता है, उस घर में लक्ष्मी का वास होता है। सुमति संत के संगति व भक्ति भावना एवं निष्ठापूर्वक कर्म करने से आता है। जिस प्रकार एक बार भोजन कर लेने से, एक बार सांस ले लेने से काम नहीं चल सकता है, उसी प्रकार एक बार कथा सुनने से काम कैसे चल सकता है? कथा व्यास ने कहा कि कथा एक संस्कार है, यह ईश्वर की कृपा है, जिसे बार-बार सुनने के बाद जीवन में ईश्वर की कृपा बरसने लगती है। शांति की प्राप्ति होती है। पंडित ने विदुर जी कि सपत्नी सहित भगवान श्री कृष्ण के प्रति प्रेम कि अद्भुत कथा सुनाई। कथा के दौरान सुंदर भजन प्रस्तुत किए गए, जिस पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। कथा दौरान श्री बंशीवट कथा समिति के प्रधान इंद्रकुमार चिड़ावेवाला, उपप्रधान सुनील गोयल, सचिव संजय तायल,
सहायक उपप्रधान राधेश्याम बंसल, कोषाध्यक्ष रामकुमार जैन, संदीप सोनी, मुनीष शर्मा, संजय गोयल, राजेंद्र जिंदल, दयानंद वर्मा, भवानी शंकर, तरुण, दीपक शर्मा, अश्वनी, रामअवतार सहित शहर के गणमान्य लोगों ने आरती की। अंत में सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।