केवल करवाचौथ व्रत से पति का जीवन नहीं बचेगा, उन्हें अधिक नमक, मैदा, चीनी,जंक फूड व तनाव से भी बचाना होगा
mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
आजकल हम भारतीय संस्कृति को छोड़कर पाश्चात्य संस्कृति के पीछे भाग रहे है, चाहे वो हमारे वस्त्र हो, चाहे वो खाद्य पदार्थ हो, चाहे पेय पदार्थ हो, चाहे वो भाषा हो, या फिर हमारा क्लाइमेट हो, उन्हें छोड़कर मॉडर्न बनने के चक्कर में, जो हमारी जीवनशैली के विपरीत है। हम आधुनिकता के नाम पर अलग क्लाइमेट में रची बसी वस्तुओं का उपयोग कर रहे है, जो न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए खरनाक है, हमारे शरीर की हर कोशिका के लिए घातक बल्कि हमारी जीवनशैली के लिए भी हानिकर है।
हमारी भारतीय संस्कृति में बहुत से उपवास, व्रत प्रतीक के रूप में दिए गए है, उनका विशेष समय में भोजन से या अपने सामान्य रहने के तरीके में थोड़ा बदलाव करने से हमारे स्वास्थ्य में तथा हमारी मानसिकता में सुधार होता है। ये उपवास हमारे तन मन को शुद्ध करने के लिए रखने का प्रावधान है। ये व्रत हमारे शारीरिक वाइटल्स को आराम देने के लिए जरूरी है, उपवास का शाब्दिक अर्थ है कि अपनी नियमित जीवनशैली को थोड़ा आराम देना, अर्थात वास को उप करना होता है। इसका सीधा सा अर्थ यह है कि हम जैसा रोज भोजन कर रहे है,
उसे उप करना है, जो सोचने का तरीका है उसे भी उप करना होता है यानी जीवन को तनाव मुक्त करना ही उपवास है। व्रत का अर्थ होता है संकल्प लेना, प्रण करना अर्थात जीवन को सादगीपूर्ण करने के लिए, ट्रेसफ्री करने को, भोजन को हल्का करने को, विचारों को शुद्ध करने को, नकारात्मकता को रोकने को शपथ लेना ही व्रत है। उपवास यानि जैसा जीवन जी रहे हो, उस नजरिए को आराम देना होता है। करवा चौथ का व्रत भी वो संकल्प है कि पति के जीवन को सुरक्षित, वा लंबा किया जाए, इसलिए उसके लिए उस दिन ये संकल्प भी लेना है, ये व्रत भी करना है कि उस दिन से घर में फास्ट फूड की कोई जगह नहीं होगी, उस दिन से पति के भोजन को मैदा मुक्त किया जाएगा, उस दिन ये व्रत भी लेना होगा कि आज से पति के भोजन या खाने पीने में मीठे का मिनिमम उपयोग होगा, उनके पेय पदार्थ से शराब को हटाने का संकल्प भी लेना होगा, उस पति देव को किसी भी प्रकार के नशे से बचाने का संकल्प भी लेना होगा।
यहां यह विमर्श करना बहुत जरूरी है कि केवल उपवास से काम नहीं चलेगा, उसे व्रत में बदलना होगा अर्थात उसे संकल्प में बदलने की जरूरत है। हर पत्नी को करवा चौथ को एक संकल्प के रूप में धारण करने की आवश्यकता है, उसे शपथ के रूप में लेने की आवश्यकता है कि अगले वर्ष हमारे भोजन से मैदा से बने खाद्य पदार्थों को बाहर रखेंगे, चाहे वो ब्रेड हो, उसमें ब्राउन ब्रेड भी शामिल है, बन हो, पास्ता हो, ब्रेड पकौड़े हो, समोसे हो, या मैदा से बनी हर फ्राइड खाद्य सामग्री को अपने भोजन से दूर रखेंगे, उसके साथ ही कोल्ड ड्रिंक्स, पैकिंग में आने वाले जूसिस, मिठाइयां, बाहर की बनी हुई किसी भी प्रकार की मिठाई, तथा अधिक नमक से बनी नमकीन, अत्यधिक मसाले वाले खाद्य पदार्थों को भी पति के भोजन से दूर रखने का संकल्प लेना होगा। किसी भी प्रकार की नमकीन वा बिस्किट हार्ट के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है।
भारतीय संस्कृति में किसी भी व्रत का मतलब है कि किसी भी प्रकार का बेहतर संकल्प लेना, संकल्प सूत्र बांधने का अर्थ भी यही है कि हम किसी अच्छे कार्य के लिए संकल्प ले रहे है, चाहे वो हमारे स्वास्थ्य को लेकर हो, चाहे वो हमारे मन को नियंत्रित करने का हो, चाहे वो हमारे भोजन की पद्धति को बेहतर बनाने से संबंधित हो, चाहे किसी भी प्रकार के अनावश्यक वस्त्र धारण न करने हो, चाहे पर्यावरण संरक्षण या जल संरक्षण से सम्बंधित हो,ये संकल्प ही जीवन को बेहतरीन बनाने के साधन है। इसे भोजन से संकल्प के रूप में जोड़ने की जरूरत है। केवल करवा चौथ या अहोई के व्रत से पति वा बच्चों का जीवन नहीं बचेगा, उसके लिए उनके भोजन से अधिक मीठा, मैदा, नमक, फास्टफूड, जंक फूड, पैकेट बंद खाने की वस्तुओं को अलग करना पड़ेगा, इसका मतलब ही यही है, अगर अपने पति या बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतरीन करना चाहते हो तो उन्हें प्रकृति के साथ जोड़ना ही होगा, अन्यथा कुछ ना होगा।
आजकल के मॉडर्न करवा चौथ के व्रत तथा आजकल की युवा पीढ़ी में बढ़ते तनाव, हाइयर टेंशन, डायबिटीज़, हार्ट की तकलीफ, अवसाद की स्थिति, पाचन क्रिया की कमजोरी, यौनशक्ति की कमजोरी, अग्रेशन, उग्रता, क्रोध, बात बात पर चिड़चिड़ापन, सहनशक्ति की कमी, मेमोरी पावर की कमी, मन की कमजोरी, ब्रेन की वीकनेस भी इस फास्टफूड, फास्ट थिकिंग का ही नतीजा है। वर्तमान में हम डायबिटीज वा कैंसर के कगार पर बैठे हुए है, इसे समझने के लिए हमे करवा चौथ का मकसद भी समझना ही पड़ेगा। यहां एक बात विशेष रूप से कहना चाहता हूँ कि करवा चौथ के व्रत के दिन एक संकल्प और लेना होगा,
जिसमें हमे अपनी सोच को भी विकसित करने की जरूरत है, अपने विचारों को हाइयर लेवल पर लेकर जाने की आवश्यकता है, जिससे हमारे जीवन में, घर परिवार में विचारों की शुद्धता हो, सकारात्मकता हो, चालाकी ना हो, कनिंगनेस न हो, सबका मान सम्मान हो, खुद से पहले दूसरों को आदर देना, भोजन में शुद्धता वा सादगी, वस्त्रों में सादगी, धन की समझदारी से उपयोगिता, अपने परिवार के वा सभी की जिंदगी को सुरक्षित रखने का भाव विकसित हों सकें। करवा चौथ का व्रत हर स्त्री को सचेत करने का दिन है कि आज का संकल्प ही हम सब स्वस्थ रहने का संकल्प हो। हम सभी का जीवन हमारे भोजन तथा जीवनशैली से निर्धारित होता है,
प्राणों को सशक्त करने के लिए प्राणायाम की जरूरत पड़ती है, शरीर को सशक्त रखने के लिए आसनों की आवश्यकता होती है, मन को नियंत्रित करने के लिए धारणा व ध्यान की जरूरत होती है, हर प्रकार के तनाव व अवसाद से दूरी के लिए समाधि की जरूरत होती है, व्यक्तिगत व सामाजिक उत्थान लिए यम नियमों के पालन की जरूरत होती है। जीवन का यही संकल्प हमे लंबी जिंदगी देगा, कि हमारा भोजन, वस्त्र, विचार, सादगीपूर्ण हो, जिसे हमारे जींस स्वीकार कर सकें। शरीर में विरुद्ध पदार्थ डालना ही शरीर के साथ अन्याय है, इसे जितनी जल्दी समझोगे, उतना ही स्वस्थ जीवन जीओगे।
जय हिंद, वंदे मातरम