अर्धवार्षिक परीक्षाओं के पहले दिन ही शिक्षा व्यवस्था की बदइंतजामी उजागर, कई स्कूलों में प्रश्नपत्र तक नहीं पहुंचे

 

 mahendra india news, new delhi
सिरसा। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जिला सिरसा ने सरकारी विद्यालयों में आज से निर्धारित अर्धवार्षिक परीक्षाओं के संचालन को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परीक्षा के पहले ही दिन अनेक विद्यालयों में समय पर प्रश्नपत्र नहीं पहुंचना विभागीय व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ खंड प्रधान रानियां कन्हैया लाल ने बताया कि खंड रानियां के विद्यालय ओट्टू के अंतर्गत 4 प्राथमिक विद्यालयों में 97 प्रश्न पत्र की जगह 50 प्रश्न पत्र ही प्राप्त हुए। चकराईयां व चकसाहिबान में एक-एक प्रति ही प्राप्त हुई। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ खंड प्रधान नाथूसरी चौपटा सुधीर सुथार ने बताया कि उनके खुद के विद्यालय में पांचवीं कक्षा के 57 बच्चों के लिए 32 प्रश्न पत्र ही मिले। खंड नाथूसरी चौपटा के मोडिया खेड़ा में 10:30  बजे तक प्रश्न पत्र पहुंचे ही नहीं।

जोधकां में विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुरूप प्रश्नपत्र उपलब्ध नहीं करवाए गए तथा 50 प्रतिशत से कम  प्रश्नपत्र प्राप्त हुए। वहीं मोचीवाली में विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाने के बजाय प्रत्येक प्रश्नपत्र की एक-एक प्रति देकर शेष प्रतियां फोटोस्टेट करवाने के निर्देश दिए गए। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ खंड प्रधान डबवाली लालबहादुर ने बताया कि मसीतां, जोगेवाला, रामगढ़, गोरीवाला, मौजगढ़, मुन्नावाली, रामपुर बिश्नोई विद्यालयों में कम प्रश्नपत्र प्राप्त हुए हैं, जबकि अबूबशहर में चौथी कक्षा का एक भी प्रश्न पत्र प्राप्त नहीं हुआ। जब खंड शिक्षा अधिकारी डबवाली से बात कि गई तो उन्होंने स्पष्ट बताया कि खंड कार्यालय कि तरफ से 50 बंडल  कि डिमांड थी, जबकि उन्हें 23 बंडल ही प्राप्त हुए हैं। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ खण्ड प्रधान सिरसा संदीप रूंडला ने बताया कि दोपहर 12 बजे तक फूलकां क्लस्टर में एक भी विद्यालय के लिए प्रश्न पत्र नहीं पहुंचे थे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अर्धवार्षिक परीक्षाओं की तिथि पहले से निर्धारित थी और विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या तथा परीक्षा संबंधी आवश्यकताओं का विभाग के पास पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, तो फिर परीक्षा शुरू होने से पहले प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी सुनिश्चित क्यों नहीं की गई?

जिला प्रधान विजय शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण शैक्षणिक गतिविधि में इस प्रकार की अव्यवस्था किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। यदि प्रश्नपत्र समय पर और पर्याप्त संख्या में विद्यालयों तक पहुंचाना विभागीय अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी है, तो उसकी जवाबदेही भी उन्हीं स्तरों पर तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर शिक्षकों से शैक्षणिक गुणवत्ता, परीक्षा परिणाम, रिकॉर्ड, आॅनलाइन पोर्टल और विभिन्न विभागीय गतिविधियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की अपेक्षा की जाती है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र जैसी मूलभूत व्यवस्था भी सुनिश्चित नहीं की जाती। ऐसी स्थिति में विद्यार्थियों और शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है और परीक्षा का निर्धारित समय एवं व्यवस्था प्रभावित होती है। जिला प्रधान शर्मा ने कहा कि प्रश्नपत्रों की कमी को पूरा करने के लिए विद्यालय स्तर पर शिक्षकों को फोटोस्टेट करवाने की जिम्मेदारी सौंप देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इससे न केवल शिक्षकों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ता है, बल्कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षक अनावश्यक प्रशासनिक व्यवस्था में उलझ जाते हैं।


ये रखी विभाग से मांगें:
उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की कि जिन विद्यालयों में प्रश्नपत्र कम पहुंचे हैं, उनकी तत्काल जांच करवाई जाए। प्रश्नपत्रों के वितरण की पूरी प्रक्रिया एवं संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों की जवाबदेही निर्धारित की जाए। विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार पर्याप्त प्रश्नपत्र विद्यालयों तक समय से पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए। प्रश्नपत्रों की कमी के कारण विद्यालयों पर पड़ने वाले अतिरिक्त फोटोस्टेट खर्च का स्पष्ट प्रावधान एवं भुगतान सुनिश्चित किया जाए। भविष्य में परीक्षाओं के दौरान ऐसी अव्यवस्था की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारी तय करते हुए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।


जिला महासचिव विजय सहारण ने कहा कि हर बार व्यवस्था की कमी का भार विभाग के सबसे निचले पायदान पर कार्यरत शिक्षक के कंधों पर डाल देना उचित नहीं है। शिक्षक का मूल दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना और परीक्षा को सुचारू रूप से संचालित करना है, न कि विभागीय स्तर पर हुई व्यवस्थागत कमियों की भरपाई करना। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को दोषी ठहराने से पहले विभाग को अपनी व्यवस्थागत कमियों और अधिकारियों की जवाबदेही पर ध्यान देना चाहिए। राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ विद्यार्थियों के हित में ऐसी किसी भी लापरवाही के प्रति आवाज उठाता रहेगा और मांग करता है कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय हो तथा विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा प्रक्रिया के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। सोमवार के दिन भी अगर परीक्षा के दौरान इस तरह कि कोई लापरवाही पाई जाती है तो जिन विद्यालयों में प्रश्न पत्र पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं होंगे उनमे सम्बन्धित परीक्षा का आयोजन करवाने का पूर्ण दायित्व एवं इसकी सम्पुरण जिम्मेदारी खंड एवं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की होगी।