सीडीएलयू में स्टूडेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम के दूसरे दिन प्रो. बी.के. शर्मा ने दिए मूल्यवान विचार

 

mahendra india news, new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा में आयोजित यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यूज़ पर आधारित स्टूडेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम के दूसरे दिन विश्वविद्यालय के पर्यावरण मामलों के सलाहकार मित्तर सैन गर्ग ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की मांग है। उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, जब तक हम अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ और कचरा-मुक्त नहीं बनाएंगे, तब तक हरियाली टिकाऊ नहीं रह सकती। इस कार्यक्रम को दीप प्रज्वलन के साथ आरम्भ किया।

आल इंडिया कॉउन्सिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की तरफ से प्रोफेसर बी.के. शर्मा ने बत्तौर रिसोर्स पर्सन प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मूलभूत मानवीय आकांक्षाओं, समग्र विकास और शिक्षा की भूमिका पर विस्तृत विचार साझा किए। उन्होंने ह्यूमन वैल्यूज की अवधारणा पर चर्चा करते हुए बताया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका लक्ष्य व्यक्तित्व का समग्र विकास होना चाहिए। रिसोर्स पर्सन ने कहा कि यूनिवर्सल ह्यूमन वैल्यूज़ केवल पुस्तकीय अवधारणाएँ नहीं हैं, बल्कि इन्हें व्यवहार और जीवनशैली में उतारना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में यदि इन मूल्यों को पाठ्यक्रम के साथ जोड़ा जाए, तो विद्यार्थी न केवल अच्छे पेशेवर बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बनेंगे।


प्रो. शर्मा ने चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा की बढ़ाई की तथा कहा कि इस प्रकार का आयोजन शेक्षणिक संस्थानों में आयोजित करवाना समय की मांग है और सीडीएलयू प्रशासन बधाई का पात्र है जो अपने विद्यार्थियों और शोधार्थियों की बेहतरी के लिए कैंपस में बेहतर माहोल के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
आल इंडिया कॉउन्सिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के आब्जर्वर की भूमिका में गुरूजम्भेश्वर विश्वविद्यालय हिसार के प्राध्यापक डॉ चरणजीत मदान ने इस अवसर पर कहा कि जीवन में सही समझ, संबंधों की महत्ता, भौतिक सुविधाओं का संतुलित उपयोग और पारस्परिक सुख मानवीय मूल्यों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक संतुलित और मूल्यपरक जीवन के लिए व्यक्ति को अपने स्वयं और शरीर के सह-अस्तित्व को समझना होगा। इस संदर्भ में उन्होंने आत्म-चिंतन और स्वाभाविक स्वीकृति की महत्ता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि व्यक्तिगत सामंजस्य, संबंधों में सामंजस्य और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना ही सार्वभौमिक मानव मूल्यों की नींव है। सेल के एडवाइजर प्रोफेसर श्यामलाल फुटेला तथा कोर्डिनेटर डॉ रविंद्र ने बताया कि दूसरे दिन के सत्र अत्यंत इंटरैक्टिव रहे, जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी जिज्ञासाएँ साझा कीं और जीवन में मानवीय मूल्यों के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की। कार्यक्रम के आगामी दिनों में भी विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा गहन विचार-विमर्श जारी रहेगा। मंच का संचालन विधि विभाग के डॉ नरेंद्र तथा डॉ अर्चना द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीन स्टूडेंट वेलफेयर और इस कार्यक्रम के डायरेक्टर प्रोफेसर राजकुमार, प्रोफेसर राजबीर दलाल ,प्रोफेसर काशिफ किदवई, डॉ रघुविंदर, डॉ अनिल घनगस आदि उपस्थित थे।