शेरपुरा भूमि तकसीम विवाद में गंभीर सवाल, उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की

 

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नाथूसरी चौपटा क्षेत्र के गांव शेरपुरा निवासी मांगेज कंवर पत्नी स्वर्गीय बने सिंह व उसके भतीजे भादर सिंह ने भूमि से संबंधित तकसीम एवं कब्जा कार्रवाई में कथित अनियमितताओं को लेकर उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस संबंध में भादर सिंह ने शुक्रवार को नाथूसरी चौपटा में प्रैसवार्ता कर अधिकारियों को दिए गए अपने लिखित आवेदन के साथ संबंधित दस्तावेज, रिपोर्ट और शपथ-पत्र प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने चौपटा के उस समय के तत्कालीन तहसीलदार, कानूनगो, पटवारी, शहीदांवाली की महिला सरबती देवी पत्नी गजे सिंह व उसके बेटे सज्जन व गजे सिंह पर आरोप लगाए हैं। 


भादर सिंह ने बताया कि बताया कि के अनुसार, उनके तकसीम मामले में 01 जून 2022 के आदेश, वारिसों से संबंधित कार्रवाई तथा बाद में हुई तकसीम प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना है कि कोविड अवधि में स्वर्गीय बने सिंह की मृत्यु के बाद भी वारिसों को उचित रूप से पक्षकार बनाए बिना आगे की कार्रवाई किए जाने की जांच होनी चाहिए।


4 मार्च की रिपोर्ट पर भी सवाल
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कानूनगो पवन कुमार द्वारा 04 मार्च 2025 को तैयार की गई रिपोर्ट की वास्तविकता और उसके आधार की जांच की जाए। इसी रिपोर्ट के आधार पर बाद में कब्जा कार्रवाई के लिए पुलिस सहायता लिए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।
मांगेज कंवर का कहना है कि मौके पर मौजूद लोगों के संबंध में अलग-अलग बातें सामने आई हैं। उनके द्वारा प्रस्तुत शपथ-पत्रों में कथित रूप से यह उल्लेख है कि मौके पर कोई झगड़ा या बोलचाल नहीं हुई थी। इसलिए पूरी घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
15 मई का नोटिस काटकर 13 मई करने का आरोप
मामले का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कब्जा कार्रवाई के नोटिस की तारीख को लेकर है। शिकायतकर्ता के अनुसार, नोटिस पर पहले 15 मई 2025 की तारीख थी, जिसे बाद में काटकर 13 मई 2025 किए जाने के संकेत दिखाई देते हैं।
मांगेज कंवर ने मांग की है कि मूल नोटिस, उसकी तामील, संबंधित रजिस्टर तथा राजस्व रिकॉर्ड को सुरक्षित रखकर यह जांच की जाए कि तारीख में कोई परिवर्तन कब, किसके द्वारा और किस आधार पर किया गया।

कथित हस्ताक्षर की जांच की मांग
शिकायत में 13 मई 2025 की कब्जा कार्रवाई रिपोर्ट में हरनाम सिंह के कथित हस्ताक्षर को लेकर भी सवाल उठाया गया है। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित व्यक्ति के वास्तविक हस्ताक्षरों के साथ मिलान कराकर सक्षम अधिकारी अथवा हस्तलेखन विशेषज्ञ से इसकी सत्यता जांची जाए।
14 मई के स्टे आदेश के बावजूद 16 मई को इंतकाल पर सवाल
दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता का दावा है कि 14 मई 2025 को कमिश्नर स्तर से स्टे आदेश हुआ था और इसकी सूचना तहसीलदार को 15 मई 2025 को दी गई थी। इसके बावजूद 16 मई 2025 को इंतकाल मंजूर किए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं।
उनकी मांग है कि पूरे रिकॉर्ड की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित अधिकारियों को स्टे आदेश की जानकारी कब मिली और उसके बाद कौन-कौन सी कार्रवाई की गई।

मांगेज कंवर की चार प्रमुख मांगें
पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
मूल नोटिस, राजस्व रिकॉर्ड, रिपोर्ट और कब्जा कार्रवाई के दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं।
कथित गलत रिपोर्ट एवं हस्ताक्षर की विशेषज्ञ जांच कराई जाए।
यदि जांच में किसी अधिकारी/कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका नियम-विरुद्ध पाई जाती है तो नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।

शिकायतकर्ता बोलीं मेरा उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं, रिकॉर्ड की सच्चाई सामने आना है
मांगेज कंवर का कहना है कि वह किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी नहीं ठहरा रही हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि मामले की जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी/वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए तथा दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।