श्री मद्भागवत कथा, हंसता-खेलता जीवन लूट रहा है नशा: साध्वी कालिंदी भारती

 
Shrimad Bhagwat Katha, Drug addiction is robbing us of a happy life: Sadhvi Kalindi Bharti
 

mahendra india news, new delhi
सिरसा। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा प्रस्तुत की जा रही इस भव्य व आलौकिक श्री मद्भागवत कथा में अध्यात्म के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर भी चर्चा व गहन चिंता प्रकट की जा रहा है। साध्वी कालिंदी भारती ने प्रभु की आलौकिक कथा में निहित गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों के साथ युवा पीढ़ी व नशा, अश्लीलता जैसी निकृष्ट सामाजिक बुराई पर प्रकाश डालने से पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुगण भाव-विभोर हो उठे। आर्थिक मंदी, बेरोजगारी, निरंतर तनाव व दबाव तथा पल-पल बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने आज युवा पीढ़ी को नशे के भयावह साम्राज्य का पंथिक बना दिया है।

स्वतंत्र देश का वासी होते हुए भी वह नशे की गिरफ्त में आकर पराधीनता का जीवन व्यतीत कर रहा है। जिस युवा के सहारे कोई देश स्वयं के लिए समुज्जवल भविष्य की किरणें देखता है, आज वही युवा अपने देश के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह बनकर खड़ा हो गया है। असामाजिक तत्व तो पहले ही देश पर घात लगाकर बैठे हैं, क्योंकि सारी दुनियां में से सबसे ज्यादा युवा भारत में ही हैं। नशीले पदार्थ घरों में सेंध लगाकर उनके हंसते-खेलते जीवन को लूट रहे हैं। जिसके परिणाम स्वरूप पारिवारिक और नैतिक मूल्य स्वार्थपरायणता की चिता पर जल पर खाक हो रहे हैं।

नशों के व्यापार को संरक्षण देने वाले इस बात को समझ नहीं रहे हैं कि चंद पैसों की खातिर वह अपने देश को किस गर्त में धकेल रहे हैं। भारत के हर एक शहर में अफीम, स्मैक, चरस, गांजा, कोकीन इत्यादि बेचने वाले सौदागर सक्रिय हैं। बड़े शहरों की दवाईयों की मंडियों में करोड़ों रुपयों की नशीली दवाओं का कारोबार होता है। थोड़ी बहुत छापेमारी के बावजूद इस कारोबार पर रोक नहीं लगती और नशे का यह दैत्य विकराल रूप धारण करता हुआ देश के युवा वर्ग को खोखला करता जा रहा है। देश के लगभग 73 मिलीयन लोग नशे के आदी हो चुके हैं जिनमें से 24 प्रतिशत की उम्र तो 18 साल से भी कम है। यह वह युवा शक्ति है, जिसके आधार पर हम 2020 में विकसित राष्ट्र और 2045 तक विश्व की महाशक्ति बनने का स्वप्न देखा रहे हैं, जो आज नशे की कंटीली राहों पर भटक रही है। यौवन इस बात पर निर्भर करता है कि आप में प्रगति करने की कितनी योग्यता है।

हारे थके मन से कोई युवा नहीं होता। यौवन तो वह है जो अपने महावेग से समस्याओं के गिरि शिखिरों को काट दे व विषमताओं के महा वट को उखाड़ दे। यदि किसी देश पर संकट के बादल छाए हैं तो युवा शौर्य ने ही प्रचंड प्रबंधन बन कर निदान किया है। साध्वी जी ने कहा कि समाज की प्रत्येक समस्या मन के स्तर पर जन्म लेती है और इसका समाधान भी मन के स्तर पर ही होना चाहिए। जब तक मानव मन को नियंत्रित करने की पद्धति नहीं प्रदान की जाती, तब तक समाज में भयानक कुरीतियां व व्याधियां जन्म लेती रहती हैं। इस मन को काबू में करने हेतु ब्रह्मज्ञान की नितांत आवश्यकता है, जिससे विवेक शक्ति जागृत होती है।

फिर हो व्यक्ति मन में उठती दुर्भावनाओं व वासनाओं पर नियंत्रण रख सकता है। नशा उपचार हेतु सरकारी, गैर सरकारी संगठनों द्वारा उपचार साधन या पद्धति लागू हो चुकी है, लेकिन यह कितनी कारगर सिद्ध हो रही है यह किसी से भी नहीं छिपा है। भारत का इग रिकॉर्ड कहता है कि उपचार के बावजूद भी 80 प्रतिशत नशाखोर फिर से नशा करने लगते हैं। उपचार प्रक्रिया से गुजरने के बाद उनका शरीर नशा मुक्त हो जाता है पर नशे की लत दिमाग से नहीं निकल पाती। इन पद्धतियों के बारे में जितनी भी जानकारी उपलब्ध हुई हैं वे अमोघ नहीं कही जा सकती। उनके विषय में व्यवस्थित व उचित खोज अभी शेष है।

समाज में फैल रही नशे की समस्या पर रोक लगाने के लिए तथा जन मानस का सही मार्ग दर्शन करने के लिए संस्थान के संस्थापक व संचालक सर्व आशुतोष महाराज ने बोध नामक नशा उन्मूलन कार्यक्रम की स्थापना की, जिसके अन्तर्गत ब्रह्मज्ञान की अमोघ पद्धति के द्वारा हजारों की संख्या में लोग नशा मुक्त हो चुके हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में उपस्थित भक्त श्रद्धालुगण अध्यात्म विज्ञान व भक्ति रस से ओत-प्रोत इस पावन कथा का आनंद उठा रहे हैं। कथा आयोजन में पंडाल को सुव्यवस्थित ढंग से सजाया गया है।

आशुतोष महाराज की शिष्या कालिंदी भारती ने अवतारवाद की व्याख्या करते हुए कहा कि जब-जब इस धर्म की ग्लानि होती है तथा अधर्म का अभ्युत्थान होता है तब.तब भगवान अपने को इस विश्व में पैदा करते हैं। अजन्मा जन्म को स्वीकार कर लेता है। अकर्ता कर्तृत्व को, अभोक्ता उपभोग को स्वीकार कर लेता है। निराकार परमात्मा साकार हो जाता है। समय-समय पर अनेकानेक अवतारों ने भारत की भूमि पर जन्म लिया है। भारत जिसे विश्व का हृदय भी कहा गया है क्योंकि ईश्वर सर्वभूत प्राणियों का धाम हैं। ईश्वर सर्व प्राणियों के हृदय में निवास करता है। सारा पंडाल नंद महोत्सव के कारण गोकुल गांव की भांति लग रहा था। जब नन्हे से कृष्ण कन्हैया को पालने में डाला गया तो सभी श्रद्धा से नतमस्तक हो उठे एवं सारा पंडाल ब्रजवासियों की भांति नाच उठा। कथा का शुभारंभ पूजन से किया गया, जिसमें मुख्य यजमान परिवार सुनील बंसल, टोनी बंसल और यजमान परिवार विपिन बंसल, मोहित शर्मा, सुरेंद्र पटेल, सुमन वर्मा परिवार द्वारा कराया गया। मुख्य अतिथि के तौर पर चौधरी रणजीत सिंह पूर्व विद्युत मंत्री हरियाणा सरकार, चंद्रशेखर मेहता प्रधान शिव शक्ति ब्लड बैंक, बिट्टी नागपाल रॉयल कोर्ट न्यूज, संयम झूंथरा निशू राज रिजॉर्ट, डा. कपिल सिंगल तिरुपति अस्पताल, रोहित चावला लायंस क्लब, अभिषेक कुमार टाटा मोटर्स, मैनेजर इशांत कुमार, प्रदीप, मोहनलाल और प्रसाद लक्ष्मी स्वीट्स के द्वारा किया गया।