बिश्नोई पंथ के 29 नियमों में 'अमावस्या व्रत' नियम का विशेष महत्व: गोविन्दशरणानन्द महाराज

 
Special significance of the 'Amavasya fast' rule among the 29 rules of the Bishnoi sect: Govindsharananand Maharaj
 

mahednra india news, new delhi
 बिश्नोई सभा, सिरसा के 52वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में गुरु जम्भेश्वर मन्दिर परिसर में चल रही जाम्भाणी हरिकथा के चतुर्थ दिवस आचार्य स्वामी गोविन्दशरणानन्द महाराज ने बताया कि गुरु जम्भोजी महाराज द्वारा प्रदत्त 29 नियमों में से 'अमावस्या व्रत' नियम की विशेष महत्ता है, जो आध्यात्मिक व वैज्ञानिक कसौटी पर पूरा उतरता है। आज अमावस्या तिथि की शुरूआत थी तथा कल प्रात: 9 बजे तक व्रत रहेगा। आचार्य जी ने बताया कि हमें अवश्य ही महीने में एक बार आने वाले इस दिन उपवास रखना चाहिये तथा परमात्मा का सुमिरन-भजन करना चाहिये।

उन्होंने प्रात: मूहर्त में स्नान की महत्ता भी बताई व कहा कि कितने ही काम पड़े हों, पहले स्नान को प्राथमिकता देनी चाहिये। कथा सुनने आये श्रद्धालुओं से आचार्य जी ने आग्रह किया कि कथा में अच्छी बातें सुनकर उन पर अमल करें। उन्होंने कई शब्दों की व्याख्या भी की। आचार्य जी ने बताया कि आज का मनुष्य प्राय: परेशान रहता है तथा छोटी उम्र से ही अवसाद में चला जाता है, जबकि हमें धार्मिक प्रवृति के लोगों को ऐसी परेशानी नहीं होनी चाहिये। हम परिश्रम करें व किसी कारण सफलता ना मिले तो भी हमें हर्ष नहीं खोना चाहिये। हम वाद-विवाद से बचें व गृहस्थी में छोटी-मोटी बातों के कारण सम्बन्ध खराब न करें।

आज की कथा में सभा पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों, सेवक दल सदस्यों के अतिरिक्त नजदीक व दूर से पुरुषों, महिलाओं व बच्चों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी पहुंचे। दानदाताओं में विशेष सहयोग के लिये ललित मेघना बिश्नोई कनाडा, राकेश को सम्मानित किया गया। बुर्ज भंगू स्थित दादा हरिराम मन्दिर से प्राप्त विशेष सहयोग के लिये भी मन्दिर कमेटी के प्रति आभार प्रकट किया गया।

इस मौके पर सुबोध कड़वासरा, ओम प्रकाश पंवार, फकीर चन्द बैनीवाल, बनवारी लाल खिचड़, जोतराम कड़वासरा, सुरेन्द्र कुमार कस्वां, रोहताश बैनीवाल पूर्व सरपंच बुर्ज भंगू, जयसिंह बैनीवाल, छबीलदास बैनीवाल, सुरजीत मीरपुर, सुशील पंजुआना, जिले सिंह पटवारी, प्रवीण धारनियां, ज्ञान प्रकाश गोदारा, पूर्णचन्द गोदारा, सीताराम बैनीवाल, रामस्वरूप आदि उपस्थित थे। आरती व प्रसाद वितरण के साथ कथा को विश्राम दिया गया।