धान खरीद, एकड़ लिमिट व पंजीकरण में धांधली के खिलाफ 30 सितंबर को कुरुक्षेत्र में जुटेगा किसान-मजदूर संघर्ष मोर्चा
mahendra india news, new delhi
बीकेई प्रदेशाध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने जानकारी देते हुए बताया हरियाणा सरकार द्वारा धान खरीद को लेकर दिए गए लिखित आश्वासन के बावजूद मंडियों में किसानों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। धान खरीद प्रक्रिया में मनमानी पाबंदियां, खरीद में जानबूझकर की जा रही देरी और फसल पंजीकरण पोर्टल की तकनीकी खामियों से किसान व मजदूर बेहद आक्रोशित हैं। इन गंभीर मुद्दों को लेकर सोमवार को 'हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा' की एक महत्वपूर्ण आॅनलाइन बैठक आयोजित की गई। बैठक में मोर्चा के प्रमुख पदाधिकारी अमरजीत सिंह मोहड़ी, मनदीप सिंह नथवान, लखविंदर सिंह औलख, जगदीप सिंह औलख, प्रिंस वैड़च, जगबीर घसोला, दलबीर सिंह, अमृतपाल बुग्गा तथा सतीश चेयरमैन सहित कई किसान नेताओं ने हिस्सा लिया।
24 से 29 क्विंटल की लिमिट पूरी तरह तर्कहीन:
किसान नेता लखविंदर सिंह औलख ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हरियाणा सरकार ने अलग-अलग जिलों में प्रति एकड़ धान खरीद की लिमिट 24 क्विंटल से 29 क्विंटल तय की है, जो पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है। वास्तविकता यह है कि प्रदेश में परमल धान की पैदावार औसतन 30 से 40 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। ऐसे में यह लिमिट लगाकर सरकार किसानों को अपनी बची हुई फसल औने-पौने दामों में निजी व्यापारियों को बेचने पर मजबूर कर रही है।
30 सितंबर को कुरुक्षेत्र में महामंथन:
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बुधवार, 30 सितंबर को कुरुक्षेत्र स्थित जाट धर्मशाला में हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा की एक अहम राज्यस्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में धान की निर्बाध खरीद, पंजीकरण की समस्याओं, मंडी व्यवस्था और खरीद लिमिट जैसे ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। मोर्चे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान अपनी खून-पसीने की कमाई लेकर मंडियों में बैठा है, लेकिन सरकार ने अभी तक एजेंसियां भी अलॉट नहीं की है। जिन शैलरों में धान लगना है, उनका भी आबंटन नहीं हुआ है।
क्योंकि सरकार व एजेंसियों की आपसी सहमति नहीं बनी है, जिसका नुकसान किसान को होगा और किसान की फसल की खरीद औने-पौने दामों पर की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र की नाकामी के कारण दर-दर भटकने को मजबूर है। यदि सरकार ने समय रहते अपनी नीतियां नहीं सुधारी और खरीद प्रक्रिया को सुचारू नहीं किया, तो 30 सितंबर की बैठक में कड़े आंदोलनात्मक कदम उठाने का बड़ा ऐलान किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी।