रक्षाबंधन पर लगेगा वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण, देंखे बहनों का ग्रहण में सजना शुभ या अशुभ?
mahendra india news, new delhi
हर साल रक्षा बंधन का इंतजार रहता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है। इसी के साथ ही हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व है. ज्योतिष शास्त्र में इसे एक अशुभ घटना के रूप में देखा गया है, इसमें किसी भी तरह की पूजा या मांगलिक कार्यों को करना वर्जित होता है. कई बार तो कुछ साधारण से कार्य को करने की भी मनाही बताई गई है।
आपको बता दें कि इस वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण सावन पूर्णिमा तिथि पर यानी 28 अगस्त 2026 को लगेगा है और इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी पड़ रहा है। ग्रहण काल में वैसे तो कई नियमों के पालन करने के नियम बताए गये हैं। ऐसे में मन में एक प्रश्र उठता है कि ग्रहण काल में श्रृंगार करना शुभ होता है या नहीं।
जानें सही है गलत
सिरसा के फेमस ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि हालांकि, चंद्र ग्रहण वाले दिन ही रक्षाबंधन है और इस दिन महिलाएं सजती-संवरती हैं और नए कपड़े पहनकर भाई को राखी बांधती हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक ग्रहण काल में महिलाओं को श्रृंगार नहीं करना चाहिए. इस दौरान बाल या नाखून काटना भी वर्जित होता है।
इन नियमों का पालन न करें तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है. ध्यान दें हिंदू मान्यताओं में श्रृंगार करना अति शुभ और पवित्र कार्य माना जाता है. शृंगार करना सौभाग्य का प्रतीक है. ऐसे में विवाहित और अविवाहित दोनों ही महिलाओं या बहनों को ग्रहण में शृंगार नहीं करना चाहिए.
अंतिम चंद्र ग्रहण कब लगेगा?
इस वर्ष का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को लगेगा, इसे हमारे देश भारत में देखा नहीं जा सकेगा. सावन पूर्णिमा तिथि पर लगने वाले इस ग्रहण को देश के किसी भी भाग से नहीं देखा जा सकेगा. जिसके कारण इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। वहीं, इस दिन देश में रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा।
इस वर्ष 2026 का चंद्र ग्रहण विश्वभर की कुछ जगहों पर दिखाई देगा, जैसे- यूरोप, उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ भाग में. भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को सुबह के वक्त 08:04 से शुरू होगा और सुबह 11:21 बजे तक लगा रहेगा. इस तरह ग्रहणकाल 03 घण्टे 16 मिनट का होगा। वहीं ग्रहण का पीक समय सुबह 09:43 बजे होगा।