भगवान को देखने योग्य दिव्य दृष्टि हमारे पास नहीं है : स्वामी आत्मानंद पुरी
जिस प्रकार काम, क्रोध, लोभ, अहंकार आदि विकार दिखते नहीं पर उनकी अनुभूति होती है वैसे ही ईश्वर को अनुभव किया जा सकता है क्योंकि भगवान को देखने योग्य दिव्य दृष्टि हमारे पास नहीं है। जैसे कमल पानी में रहते हुए भी उससे अछूता रहता है, वैसे ही संसार में रहते हुए भी मोह माया से निर्लिप्त रह कर ईश्वरीय याद बनाए रखते हुए सांसारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए सद्कर्म करते रहेँ। उक्त प्रवचन स्वामी आत्मानंद पुरी महाराज ने शिव शक्ति योग मिशन द्वारा सेक्टर स्थित लक्ष्मी नारायण मन्दिर में आयोजित भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहे।
स्वामी आत्मानंद पुरी ने कहा कि जब भी किसी ने अपनी शक्ति तथा अहंकार को त्याग कर सच्चे मन व भाव से पूर्ण आस्था व श्रद्धा रखते हुए भगवान को पुकारा है, भगवान उसकी रक्षा को अवश्य आए हैं, बस भक्त को भगवान पर अटूट विश्वास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सब तरफ से निराश होकर गजेंद्र व द्रोपदी ने प्रभु को पुकारा तो भगवान ने दोनों की पुकार सुनी। सागर मंथन के समय निकले विष को शंकर द्वारा अपने कंठ में धारण करने पर नीलकंठ महादेव कहलाने का उदाहरण देते हुए स्वामी ने सेवा को परम धर्म बताते हुए श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि कुछ समय सेवा कार्यों में जरूर लगाएं क्योंकि कि दूसरों का दुख दूर करते हुए लगने वाला दाग भी आभूषण बन जाता है।
भगवान कृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए स्वामी ने कहा कि कंस द्वारा अपनी तरफ से हर सम्भव प्रयास करने पर भी वह अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सका। तत्पश्चात हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की के उद्घोष के साथ भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भक्तों व महिलाओं ने भजन गाते व नाचते हुए भगवान के जन्म पर अपनी खुशी का इजहार किया।
मोहन डिंगवाला के बेटे ने कृष्ण के रूप में सब को खूब लुभाया। कथा में नत्थू राम गर्ग, सुशील गोयल, मदन लाल गुप्ता, निर्मल कंदोई, विश्व बंधु गुप्ता, योगेश गर्ग, सुमन मित्तल, सुभाष जिंदल, रमेश जमालिया, अमित कुमार, डा. एसएल अग्रवाल किशन कुमार, कीर्ति बंसल, सुरेश बंसल, गीतांश शर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, उजाला राम, हमेश गर्ग, दिनेश गर्ग, सुभाष खेतड़ी वाला, जीतराम, भीम जिंदल, मोहन डींगवाला, शिव शंकर गोयल, अनिल गोयल, रानियां से ओम प्रकाश, आदमपुर से प्रेम कुमार, पवन चौधरी रानियां उपस्थित रहे।