वैचारिक विस्तार और सभी की समृद्धि के लिए नव वर्ष में कदम रखने का प्रण लें
mahendra india news, new delhi
लेखक
नरेंद्र यादव
नेशनल वाटर अवॉर्डी
यूथ एंपावरमेंट मेंटर
लैटिन भाषा का एक फ्रेज है कि " एक्स निहिलो निहिल फिट" अर्थात नथिंग में से नथिंग ही निकलता है। इसका सीधा सा अर्थ है कि जो हमारे भीतर है वहीं बाहर की रचना करेगा। नथिंग में से नथिंग ही उत्पन्न होगा, यही सच्चाई है। नव वर्ष 2026 में हर किसी को वैचारिक विस्तार के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है क्योंकि संकीर्णता से संकीर्णता ही जन्म लेती है, छोटे विचारों से छोटे छोटे दायरे ही बनते होते है, छोटे विचारों से सोचने समझने की धारा भी संकीर्ण हो जाती है। हमारे सामने सूर्य वर्ष के रूप में 2026 है जिसमें हम सभी को सूर्य की भांति ही अपने विचारों को प्रकाशमय तथा सभी तक पहुंचाने की शपथ लेनी चाहिए, जिससे ये पृथ्वी एक परिवारीय विचार, "वसुधैव कुटुंबकम् " की लय ताल पर एकता लेकर आ सके। हम जब भी किसी नए संकल्प के साथ आगे बढ़ते है तो जीवन बेहतर होता है।
वसुधैव कुटुंबकम् का अर्थ जिसको समझ नहीं आता है वो इसे समझने के लिए अपने मन में पड़ी हुई गांठ को खोलने का कार्य करें ताकि जीवन में सादगी, निर्मलता, निर्भयता तथा समरसता का आगमन हो। जब हम समुद्रमंथन की बात करते है तो सागर सा हृदय व सागर के समान अपनी गतिविधियों को भी गढ़ना चाहिए, जब हम समरसता की बात करते है तो हृदय में समता का एहसास भी होना चाहिए, जब हम समानता का विचार करते है तो एक दूसरे के प्रति सम्मान के भाव भी होने चाहिए, जब हम वसुधैव कुटुंबकम् का विमर्श करते है तो सब को एक समान समझने का भाव भी भीतर होना चाहिए, जब हम विशालता की बात करते है तो विशाल रूप का मतलब भी समझ में आना चाहिए, जब हम विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनने की बात करते है तो भीतर श्रेष्ठता भी होनी चाहिए, अन्यथा छोटे विचारों से कभी भी समुद्र में गोता नहीं लगा पाएंगे।
नव वर्ष हमे सभी के दुखदर्द सुनने के लिए संवेदना तथा भगवान श्री गणेश की तरह के बड़े कान दें, हमे सभी के विचारों को समझने के लिए श्री गणेश जी जैसा कुंभ सा उर दें, वसुधैव कुटुंबकम् के अर्थ को समझने के लिए श्री गणेश जी जैसा बड़ा सिर दें, हर किसी की तकलीफ को सूंघने के लिए बड़ी सी सूंड दें, ताकि सभी का जीवन सरल तथा समृद्ध बन सकें। कभी कभी व्यक्ति बड़े से बड़े सरोवर में रहकर भी प्यासा रह जाता है, उसका केवल एक ही कारण है कि ऐसे लोग अलग घट में रहने के लिए अपने दायरे छोटे कर लेते है और सरोवर के अथाह जल में रहते हुए भी उनके पास एक बूंद भी नहीं जाती है।
जीवन में जैसे विचार होंगे, जैसी सोच होंगी, वैसा ही हमारा संसार होगा, अगर विचार छोटे है तो संसार भी छोटा होगा, अगर विचार बड़े है तो संसार भी बड़ा होगा। जब हम अपनी सोच को छोटा करने लगते है तो हमारे भीतर एकलता आने लगती है, हमारे घेरे बहुत छोटे होने लगते है, हमारे परिवार छोटे होने लगते है, है, हमारे कुटुंब अल्प होने लगते है, हम संकीर्णता के शिकार होने लगते है, जिसके कारण असहजता, भय, विचलन, स्वार्थ, लोभ, मोह तथा राग द्वेष हमारे अंदर पनपने लगते है। हम एक दूसरे पर संदेह करने लगते है, और एक दूसरे के प्रति ईर्ष्या का भाव बनने लगता है। यह नव वर्ष जीवन को विशालता देने वाला हो, यह वर्ष सादगी देने वाला हो, यह नव वर्ष निर्मलता देने वाला हो, यह नव वर्ष हमारे मुख से प्रेरक शब्द देने वाला हो, किसी के जीवन को प्रेरणा देने वाला बने,
यह नया साल हमारे कानों को सभी को सुनने की क्षमता, तथा धीरज देने वाला हो, सभी के प्रति सामानुभूति वाला बने, यह नव वर्ष सभी के प्रति समरसता का भाव रखने वाला हो, एकता व सद्भावना का वाहक बने, यह नया वर्ष हमारे चेहरे पर खुशी प्रदर्शित करने वाला बनें, यह नव वर्ष सभी के प्रति प्रगाढ़ प्रेम की धारा बहाने वाला तथा स्नेहिल बनें, यह नव वर्ष सभी को स्वास्थ्यवर्धन करने वाला हो, सभी के जीवन की सकारात्मक मनोकामना पूर्ण करने वाला बनें, यह नव वर्ष सभी को सौंदर्य प्रदान करने वाला बनें, हरेक के दिल में शांति, संतुष्टि तथा संपूर्णता देने वाला बने,
यह नया साल सभी के लिए अच्छे अच्छे मित्रों से भर जाएं, यह नव वर्ष सभी के संकल्पों को पूर्ण करने में सहयोग देने वाला हो, यह नव वर्ष पशु पक्षियों के लिए दया करुणा का भाव रखने वाला हो, सभी जीवों को उनके अधिकारों को देने वाला बने, सभी के जीवन में हर कष्ट को सहन करने की क्षमता देने वाला हो, इस नव वर्ष में किसी को अवसाद न हो, किसी कोई दुख न हो। यह नव वर्ष भारत को विकसित करने वाला बने, भारत को विश्व गुरु बनने में मदद करने वाला बने, सभी प्राणियों में सद्भावना करने वाला बनें, गौमाता के संरक्षण का वर्ष बने, यह नव वर्ष जाति संप्रदाय से ऊपर उठने वाला बनें ताकि इस वसुंधरा पर हर जीवन जंतु, वनस्पति, प्राणी सुखी रहे तथा राष्ट्र के लिए संपदा बनें।
जय हिंद, वंदे मातरम