ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान शिक्षा शिविरों के नाम पर विद्यार्थियों/शिक्षकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़- अध्यापक संघ
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ संबद्ध सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा एवं स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राज्य प्रधान प्रभु सिंह,महासचिव रामपाल शर्मा, कैशियर संजीव सिंगला, वरिष्ठ उपप्रधान गुरमीत सिंह,उपमहासचिव कृष्ण नैन,संगठन सचिव सुखदर्शन सरोहा, प्रैस प्रवक्ता निशा व कार्यालय सचिव सत्यनारायण यादव ने सयुक्त प्रैस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि छुट्टियों के दौरान 25 से 31 मई तक आयोजित किए जा रहे भाषा शिक्षण के नाम पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। एक तरफ तो 21 मई को जारी विभागीय पत्र द्वारा भीषण गर्मी से बचने की हिदायतों के साथ 25 मई से 30 जून तक प्रदेश में स्कूली अवकाश घोषित किया जा चुका है, दूसरी तरफ इस तरह के शिविरों/सेमिनारों के नाम पर अपने ही आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि संगठन केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करता। शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था के हित में हर निर्णय विवेक, संवाद और न्याय के आधार पर लिया जाना चाहिए। विभाग ने भीषण गर्मी के कारण समय से पहले अवकाश घोषित किए है,दूसरी तरफ बच्चों के भाषा शिक्षा के नाम पर 25 से 31मई तक समर कैंप का शेड्यूल जारी कर दिया गया जोकि बच्चों/शिक्षकों के स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है,जिसका संगठन पुरजोर विरोध करता है। यह भाषा शिक्षा कार्य बच्चे के मूल पाठ्यक्रम के साथ ही भारतीय भाषा विषेशज्ञों से करवाया जाना चाहिए। इस प्रकार के कार्यक्रम शिक्षकों के परामर्श, सम्मान और व्यावसायिक गरिमा को मध्यनजर रखकर करवाने चाहिए।
परन्तु इस प्रकार के प्रशिक्षणों में अध्यापकों व बच्चों को अवकाश के दौरान जबरन उपस्थिति के लिए बाध्य किया जा रहा है, जो कि सीधा-सीधा शोषण है और ऐसे में विरोध अवश्यंभावी हो जाता है क्योंकि इस तरह के शिविर सिर्फ बजट की औपचारिकता और उपस्थिति की खानापूर्ति तक सीमित होकर रह जाते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि शिक्षकों को अन्य विभागों की तुलना में लगभग आधे अवकाश ही मिलते हैं और अब उन सीमित छुट्टियों में भी जबरन प्रशिक्षण थोपकर शेष अवकाश भी छीने जा रहे हैं। अन्य विभागों के कर्मचारियों को 52 शनिवार,15 से 30 अर्जित अवकाश, 20 चिकित्सा/हाफ डे तथा 4 प्रतिबंधित अवकाश मिलते हैं। इसके विपरीत, शिक्षकों को मात्र 12 द्वितीय शनिवार और 10 अर्जित अवकाश ही दिए जाते हैं। जब विभाग यह कहता है कि शिक्षकों को गर्मी व सर्दी में लंबी छुट्टियाँ मिलती हैं, तो यह एक दिखावटी संतुलन है
क्योंकि यह छुट्टियाँ भी शिक्षकों के पारिवारिक, सामाजिक या व्यक्तिगत उपयोग के लिए नहीं होतीं, बल्कि बच्चों की अनुपस्थिति को ध्यान में रखते हुए ‘अनिवार्य उपस्थिति-मुक्त’ होती हैं। अगर शिक्षकों को वेकेशन कर्मचारी माना जाता है, तो छुट्टियों में प्रशिक्षण थोपने का कोई औचित्य नहीं है और अगर नॉन-वेकेशन कर्मचारी माना जाता है, तो उन्हें समान अधिकार, सुविधाएँ और नीति-सम्मत अवकाश दिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ मांग करता है कि स्कूली शिक्षा विभाग को नॉन-वेकेशन विभाग घोषित किया जाए, ताकि शिक्षकों को भी अन्य विभागों की भाँति सभी प्रकार के नियमित, अर्जित, चिकित्सा व अन्य अवकाश की समान सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि संगठन इस तरह के तुगलकी फरमानों, शिक्षा के सार्वजनिक ढांचे को बचाने और शिक्षकों की लंबित मांगों की रूपरेखा तय करने हेतु 1, 2 जून को जाट धर्मशाला हिसार में दो दिवसीय राज्य कौंसिल सम्मेलन आयोजित करेगा और प्रदेश के सभी शिक्षकों से आह्वान करता है कि 9 जून को शिक्षा सदन पंचकूला पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर भाग लेकर यह स्पष्ट करें कि शिक्षक अपनी गरिमा, अधिकार और न्याय के लिए संगठित और संघर्षशील हैं।
