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आधुनिक भारत के परिप्रेक्ष्य में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का महत्व और प्रासंगिकता” विषय पर व्याख्यान का आयोजन

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Organizing a lecture on the topic “Importance and relevance of the thoughts of Pandit Deendayal Upadhyay in the context of modern India

mahendra india news, new delhi
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा इतिहास, समाजशास्त्र एवं सामाजिक कार्य (USGS) विभागों के सहयोग से “आधुनिक भारत के परिप्रेक्ष्य में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का महत्व और प्रासंगिकता” विषय पर एक विस्तार व्याख्यान का आयोजन टैगोर लेक्चर थिएटर में हाइब्रिड मोड में किया गया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. राजबीर सिंह दलाल ने की। उन्होंने अपने स्वागत उद्बोधन में मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता एवं सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर विजय कुमार रहे, जिन्होंने अपने संबोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भाईचारा, सामंजस्य, अपनापन, परिवार की तरह मिल-जुलकर रहना तथा आपसी संवाद जैसे मूल्य आज के समाज के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इन मूल्यों के माध्यम से न केवल समस्याओं का समाधान संभव है, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सभी का सहयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों में संस्कारों के विकास पर भी विशेष जोर दिया।

उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसे समकालीन भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की परिकल्पना प्रस्तुत करता है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलसचिव प्रोफेसर पवन शर्मा रहे। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन सादगी, त्याग, राष्ट्रभक्ति और समाज सेवा का अद्भुत उदाहरण है। प्रो. शर्मा ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कभी पद या प्रतिष्ठा की लालसा नहीं की, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को ही अपने चिंतन का केंद्र बनाया।

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उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। युवाओं को उनके जीवन से ईमानदारी, अनुशासन, राष्ट्र के प्रति समर्पण और सामाजिक दायित्व की भावना सीखनी चाहिए। एकात्म मानववाद की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रो. शर्मा ने कहा कि यह विचारधारा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के समग्र एवं संतुलित विकास का मार्ग प्रशस्त करती है तथा युवाओं को केवल भौतिक उन्नति ही नहीं, बल्कि नैतिक और मानवीय मूल्यों से भी जोड़ती है।


कार्यक्रम में मंच संचालन सुनील द्वारा किया गया। धन्यवाद डॉ नीलम द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. उमेद सिंह, प्रो. राजकुमार सिवाच, प्रो. विष्णु भगवान, डॉ. रोहतास, डॉ. नीलम, डॉ. जगसीर भारत, गुरसाहिब सिंह सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।