ग्रीष्मकालीन अवकाश में आपके बच्चे का भी नहीं लगता पढ़ाई में मन, तो आज से ही करें ये 6 कार्य
इस समय ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। इस मौसम में बच्चे घर पर पढ़ाई करने से कतराते हैं। वहीं बोर्ड की परीक्षा देने वाले बच्चों के अभिभावक चिंता में है। उसके बच्चे के अच्छे नंबर आए। मगर ऐसे में देखने में आया है कि बहुत से बच्चे पढ़ाई में अच्छे होते है, वो खूब मेहनत कर एग्जाम में अच्छे मार्कस के लाते है। लेकिन कुछ बच्चे का मन पढ़ाई से दूर भागता है। ऐसे में अगर आप उन्हें जबरदस्ती पढ़ाने बैठेंगे तो बच्चों के दिमाग पर काफी स्ट्रेस रहता है।
इस स्ट्रेस और टेंशन की वजह से बच्चे जो पढ़ते है उसे भी भूल जाते है। ऐसे में आज हम आपको कुछ वास्तु टिप्स बताएंगे, जिन्हें फॉलो कर आप बच्चों के एग्जाम स्ट्रेस को दूर कर उन्हें टेंशन फ्री कर सकते हैं, इसके साथ ही अगर आपके बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता तो वो उसका मन भी ऐसे बदल सकता है।
सही दिशा में हो स्टडी रूम
बच्चों का अध्ययन कक्ष उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। यदि इस दिशा में पढ़ाई करना संभव न हो तो पूर्व, उत्तर या पश्चिम दिशा में मुंह करके पढ़ाई कर सकते हैं। इससे उनका मन पढ़ाई में ज्यादा लगता है।
पूर्व दिशा में होना चाहिए सिर
आपको बता दें कि बच्चों का सोते समय सिर पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। ऐसे सोने से उनकी स्मरण-शक्ति बढ़ेगी और सेल्फ स्टडी में भी उनका मन लगेगा।
कमरे में हो पर्याप्त रोशनी
इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे के स्टडी रूम में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो और वहां अंधेरा ना रहे। इससे उनके कमरे में सकारात्मक ऊर्जा होगी।
कमरे का कलर भी हो सही
बच्चों के स्टडी रूम में हल्के रंग जैसे- हल्का पीला, गुलाबी, आसमानी, हल्का हरा आदि करवाएं। इससे उनका दिमाग शांत रहेगा और स्मरण शक्ति भी बढ़ेगी।
वास्तु के अनुसार, बच्चों के स्टडी रूम में माता सरस्वती की फोटो भी जरूर लगानी चाहिए। साथ ही स्टडी टेबल दीवार से सटा होना चाहिए और किताबों को साउथ ईस्ट दिशा में रखें।
बच्चों के कमरें में जरूर हो ये चीजें
वास्तु शास्त्र के मुताबिक बच्चों के स्टडी रूम में एक पेंडुलम वॉच, ग्लोब और प्रिज्म जरूर होना चाहिए। इससे उनकी स्मरण शक्ति बढ़ती है साथ ही उनका पढ़ाई में ध्यान भी लगता है।