आनन्द सरोवर SIRSA में 3 डी इमरसिव अनुभव के लिए उमड़ा जन सैलाब, SIRSA शहर की प्रतिष्ठित हस्तियों सहित सैकड़ों लोग हुए शामिल
Mahendra india news, new delhi
ब्रह्माकुमारीज़ के स्थानीय सेवा केन्द्र और मुख्यालय माउंट आबू में हर वर्ग के लिए होने वाले उतकृष्ट और मूल्यनिष्ठ आयोजन समाज के लिए बहुमूल्य उपहार है क्योंकि यह आयोजन व्यक्ति के पारिवारिक, व्यवसायिक और सामाजिक जीवन के हर पहलू को सकारात्मक दिशा देकर दिनचर्या को सहज और प्रभावशाली बना रहे हैं। यह उदगार ब्रह्माकुमारीज़ आनन्द सरोवर में आयोजित हुए --हीलिंग मेडिटेशन फॉर पीसफुल लाइफ विषय पर 3डी इमरसिव एक्पीरिएंस-- कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए चौ.देवी लाल विश्व विद्यालय के कुलगुरू डा. विजय कुमार जी ने व्यक्त किए। कार्यक्रम मे कुलगुरू सपरिवार उपस्थित हुए और मंच से प्रस्तुत हो रहे संगीतमय और उत्साहमय आयोजन का आनन्द लिया। इसके अलावा जिला कारागार के एस. पी. श्री जसवन्त सिंह जी ने भी इस मौके सपरिवपर बतौर विशेष अतिथि शिरकत की और अपनी शुभ भावनाएं प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम को दिव्य उर्जा और आनन्द का स्त्रोत बताया और संस्थान का आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे संस्था के मुख्यालय माउंट आबू से पधारे बी के डा. शक्तिराज और मुम्बई से पंहुचे इंडियन आयडल सीसन वन के टॉप फाइनलिस्ट, भारतीय संगीत इंडस्ट्री के सुप्रसिद्ध गायक बी के हरीश मोयल ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। बी के हरीश ने अपने आध्यात्मिक अनुभवों को संगीत के माध्यम से बताते हुए परमशक्ति की महसूसता कराई और ओम के उच्चारण के साथ शांतमय जीवन का आनन्द लेने के लिए नियमित आत्म अध्ययन के लिए प्रेरित किया।
आनन्द सरोवर सर्कल की निदेशिका राजयोगिनी बिन्दू दीदी ने उपस्थित विशिष्ट मेहमानों एवं सभा का आभार प्रकट करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों का लक्ष्य जन मानस को नशा, अवसाद, निराशा जैसी मानसिक समस्याओं से मुक्त कर श्रेष्ठ वृत्तियों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देना है। उन्होंने बताया कि संस्था में आने वाले नियमित बी के भाई बहनों ने भी 30 मई को पूरा दिन गहन साधना का अभ्यास किया ताकि समाज में फैल रही अनिश्चितता और भय की उर्जा को कम किया जा सके । बहन जी ने 31 मई तम्बाकू डे पर भी अपना संदेश दिया और कहा कि जीवन की हर समस्या का हल आध्यात्मिक शक्ति ही है उसे संगीत या मोटिवेशनल क्रियाकलाप, किसी भी विधि से इसको जीवन का अभिन्न अंग बनाना ही होगा।