शीतला अष्टमी इस बार बेहद खास? जानिए शुभ मुहूर्त और संयोग
इस बार शीतला अष्टमी को लेकर इंतजार रहता है। यह पर्व हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। इस बार बुधवार 11 मार्च को शीतला अष्टमी है। इस शुभ मौके पर ममतामयी माता शीतला की पूजा होती है। इसी के साथ ही उनके निमित्त उपवास रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जगत की देवी मां शीतला की पूजा करने से शारीरिक एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
ज्योतिष्चार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि शीतला अष्टमी पर कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इस योग में जगत की देवी मां शीतला की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। आइए, शीतला अष्टमी के बारे में सबकुछ जानते हैं-शीतला
ज्योतिष्चार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को देर रात्रि एक बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी और 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार यानी उदया तिथि गणना से 11 मार्च को शीतला अष्टमी मनाई जाएगी। शीतला अष्टमी पर पूजा के लिए शुभ वक्त 11 मार्च को सुबह 06 बजकर 36 मिनट से लेकर शाम 06 बजकर 27 मिनट तक है। इस दौरान साधक देवी मां शीतला की पूजा कर सकते हैं।
शीतला अष्टमी शुभ योग
ज्योतिष्चार्य पंडित लालचंद शर्मा ने बताया कि चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इस दिन सिद्धि योग का संयोग सुबह 09 बजकर 13 मिनट से है। इसके साथ ही शिववास योग का भी संयोग है। शिववास योग का संयोग 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट तक है। इस दौरान मां शीतला की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी। साथ ही आरोग्य जीवन का वरदान मिलेगा।
पंचांग
सूर्योदय - सुबह 07 बजकर 15 मिनट पर
सूर्यास्त - शाम 05 बजकर 42 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 27 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 13 मिनट से 02 बजकर 55 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 05 बजकर 39 मिनट से 06 बजकर 07 मिनट तक
निशिता मुहूर्त - रात्रि 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक
नोट : इस समाचार को लिख्खने के लिए ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। इस समाचार को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। धन्यवाद :