कृष्ण जन्माष्टमी पर्व आज? यह है सही तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
mahendra india news, new delhi
हर वर्ष भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व का इंतजार रहता है। देशभर में जन्माष्टमी का पर्व आज मनाया जा रहा है। मंदिरों व घरों में कृष्ण जन्माष्टमी पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की गई है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर्व पर भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र में यशोदा नंदन का जन्म हुआ था। हर वर्ष इसी दिन कान्हा जी का जन्मोत्सव भव्य तरीके से मनाया जाता है।
देश के प्रसिद्ध कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर खास तैयारियां की जाती हैं। इस दिन कान्हा जी का विशेष साज-श्रृंगार किया जाता है। इतना ही नहीं बाल गोपाल को 56 तरह के भोग लगाए जाते हैं। वहीं कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मंदिर और घरों में लड्डू गोपाल की भव्य झांकियां भी लगाई जाती हैं। तो आइए जानते हैं कि इस साल कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 कही सही तारीख
ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि पंचांग के मुताबिक भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 4 सितंबर को देर रात्रि 2 बजकर 25 मिनट पर होगा। अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर को देर रात्रि 12 बजकर 13 मिनट पर होगा। भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ - सितंबर 04, 2026 को 12:29 ए एम बजे
रोहिणी नक्षत्र समाप्त- सितंबर 04, 2026 को 11:04 पी एम बजे
मध्यरात्रि का क्षण- 12:37 ए एम, सितंबर 05
निशिता पूजा का समय - 12:14 ए एम से 01:01 ए एम, सितंबर 05
भगवान कृष्ण पूजा विधि
ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था इसलिए निशिता काल में बाल गोपाल की पूजा करना खास माना जाता है। तो इस मुहूर्त में सबसे पहले बाल गोपाल को स्वच्छ जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद लड्डू गोपाल को नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर उनका श्रृंगार करें। अब कान्हा जी को चंदन का तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर कृष्ण जी की आरती करें और उन्हें माखन-मिश्री समेत अन्य भोग लगाएं। श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी अनिवार्य होता है तो भोग और पूजा में तुलसी जरूर रखें।