इस तिथि को रखा जाएगा पुत्रदा एकादशी व्रत, संतान सुख के लिए करें यह 3 काम

 

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सावन शुक्‍ल एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं। वैसे देखें तो वर्ष में 24 एकादशी आती हैं, इनमें से हर एक का अलग महत्‍व है, मान्‍यता है कि सावन शुक्‍ल एकादशी व्रत रखने और सच्‍चे मन से पूजा करने से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं। इसी के साथ ही संतान की लंबी आयु, सेहत और समृद्ध जीवन के लिए भी यह व्रत रखा जाता है. पुत्रदा एकादशी के दिन किए गए खास उपाय नि:संतान दंपपत्तियों के लिए संतान सुख के योग बनाते हैं। 

इस दिन है पुत्रता एकादशी
सिरसा के प्रसिद्ध ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि वैद्रिक पंचांग के मुताबिक सावन शुक्‍ल एकादशी यानी कि पुत्रदा एकादशी 22 व 23 अगस्‍त की रात 02:00 बजे प्रारंभ होगी और 24 अगस्‍त की सुबह 04:18 बजे खत्म होगी. उदयातिथि के आधार पर 23 अगस्‍त को पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस वर्ष पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 23 अगस्त को सुबह 07:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक है।  

पुत्रदा एकादशी पारण समय 
ज्योतिषचार्य पंडित नीरज शर्मा ने बताया कि पुत्रदा एकादशी का व्रत पारण 24 अगस्त 2026, सोमवार को किया जाएगा. इसके लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 बजे तक रहेगा. ध्‍यान रहे कि एकादशी व्रत के पारण में चावल, चने की दाल, मसूर की दाल, बैंगन, लहसुन-प्‍याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन न करें. बल्कि सात्विक भोजन से ही व्रत का पारण करें. 

पुत्रदा एकादशी के दिन करें यह करें कार्य  
धर्म-शास्‍त्रों में संतान सुख पाने के लिए पुत्रदा एकादशी के दिन कुछ उपाय करने की सलाह दी गई है. इसके अनुसार पुत्रदा एकादशी व्रत रखने, भगवान विष्‍णु और माता लक्ष्‍मी की पूजा करने के साथ-साथ ये उपाय करने से बहुत लाभ होता है. 

पूजा में पीले फूल, वस्‍त्र और फल: पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्‍णु का पीले वस्‍त्रों, पीले फूलों से श्रृंगार करें. पीले फल जैसे केले, आम आदि अर्पित करें. पीली मिठाई का भोग लगाएं. इससे कुंडली में संतान का कारक ग्रह गुरु मजबूत होता है और जल्‍द संतान प्राप्ति के योग बनते हैं. 

तुलसी पूजा: पुत्रदा एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में जल न चढ़ाएं लेकिन घी का दीपक लगाएं. तुलसी की परिक्रमा करें. तुलसी माला से "ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:" मंत्र का जाप करें.

दान-पुण्‍य: पुत्रदा एकादशी के दिन अपनी सामर्थ्‍य के अनुसार गरीबों को फल, अन्न, वस्त्र व अन्य वस्तु का दान करें।